आसमान में इन्द्रधनुष को देखकर बच्चे कितना आनन्दित होते हैं! अजी बच्चे तो क्या आपको भी मजा आ जाता है।
पर इन्द्रधनुष हमेशा थोड़े ही दिखता है? यह तो तभी दिखता है जब बारिश होते समय या उसके बाद सूर्य निकल आया हो। पर आप अपने बच्चों को इन्द्रधनुषीय रंगों को जब चाहे तब दिखा कर खुश कर सकते हैं बशर्तें कि उस समय सूर्य निकला होना चाहिये। इसके लिये आपको मात्र एक उथला प्लास्टिक का डिब्बा या कोई उथला बर्तन जिसमें पानी भरा जा सके, एक दर्पन और एक सफेद कागज की जरूरत पड़ेगी।
डिब्बे या बर्तन को सूर्य के प्रकाश में किसी टेबल या जमीन पर रखकर उसमें लगभग दो तिहाई पानी भर दें और उसमें दर्पन कोण बनाते हुए, जैसा कि नीचे चित्र में दर्शाया गया है, डाल दें। सूर्य से आने वाली प्रकाश बर्तन में पड़े दर्पन से परावर्तित होगी। परावर्तित प्रकाश के रास्ते में सफेद कागज को हाथ से पकड़ें। कागज में इन्द्रधनुष के रंग दिखाई पड़ने लगेंगे।
अब अपने बच्चों को समझायें कि क्यों होता है ऐसा। पहले उन्हें यह बतायें कि इन्द्रधनुष क्यों बनता है। वास्तव में सूर्य का प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना हुआ है। किसी प्रिज्म के सहारे इन रंगों को अलग अलग किया जा सकता है। आसमान में स्थित बादलों में निहित पानी की बूँदें प्रिज्म का कार्य करती हैं। जब सूर्य का प्रकाश इन पानी की बूँदों पर पड़ता है तो प्रकाश के अपवर्तन Refraction एवं परावर्तन reflection के कारण वह अपने मूल रंगों में परिवर्तित हो जाता है और इन्द्रधनुष दिखाई पड़ता है। इसी प्रकार ऊपर के हमारे उपरोक्त प्रोजेक्ट में पानी और दर्पन मिलकर प्रिज्म का काम करते हैं और सूर्य का प्रकाश इन्द्रधनुषीय रंगों में विभाजित हो जाता है।













