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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह ने किसानों के हित में ऐसी व्यूह रचना की है कि अब यह चिंता करनने की आवश्यकता ही नहीं रह गई है कि कि बीज कहाँ से आएगा, खाद कैसे मिलेगी, दवा कैसे मिलेगी, बिजली कैसे मिलेगी?

श्री रमन सिंह ने किसानों की सुविधा के लिए योजनाओं का ऐसा ताना-बाना बुना है, कि किसानों को हर चीज, सही समय पर, बिना किसी दिक्कत के मिल सके।

7 लाख 45 हजार क्विंटल बीजों का तथा 10 लाख 65 हजार मीट्रिक टन खाद का इंतजाम भी किया गया है।

किसानों को पहले 14 प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण लेना पड़ता था, जो ऊँची दर होने के कारण, किसान ब्याज पटाने के चक्कर में परेशान रहते थे और डिफाल्टर होने से उनकी प्रगति रूक जाती थी। महंगे कर्ज के दुष्चक्र को वर्तमान सरकार ने तोड़ दिया है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने लगातार ब्याज दर कम की है और लगभग पांच साल से बिना ब्याज के अल्पकालिक कृषि ऋण दे रही है, जिसका लाभ हर साल 11 लाख किसानों को मिलता है।

छत्तीसगढ़, देश का पहला राज्य बनाया गया, जिसने किसानों को ब्याज मुक्त ऋण देने की व्यवस्था की थी।

छत्तीसगढ़ में किसान पहले सिर्फ 150 करोड़ रूपए का ऋण ही लेते थे, लेकिन ब्याज मुक्त ऋण मिलने के बाद धीरे-धीरे परिवर्तन आया आज 3 हजार करोड़ रूपए से अधिक कृषि ऋण किसान उठा रहे हैं।

इससे पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में किसानों की अर्थ-व्यवस्था ने कितनी ऊंची छलांग लगाई है। 20 गुना अधिक ऋण लेने से उनके उत्पादन का मूल्य भी कई गुना अधिक बढ़ा है।

धान छत्तीसगढ़ की जान है। इसलिए श्री सिंह ने धान खरीदी की शानदार और पारदर्शी व्यवस्था की है, हमारी ’’किसान हितकारी व्यवस्था’’ की तारीफ पूरे देश में हो रही है।

1.989 उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी की व्यवस्था है।

विगत 13 वर्षों में 6 करोड़ 22 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और किसानों को करीब 64 हजार 730 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया।

कृषि लागत कम करने के उपाय, अच्छी फसल, खरीदी की शानदार व्यवस्था आदि के कारण किसानों में समृद्धि बढ़ी है। किसानों की जिंदगी में सुखद बदलाव आया है।

धमतरी में प्रदेश का पहला ‘किसान-बाजार’ शुरू किया गया है। जिला प्रशासन की पहल पर ऐसी व्यवस्था की गई है, जिसमें उत्पादक और ग्राहक को नजदीक लाया गया है और मध्यस्थ को हटा दिया गया है। इस तरह सब्जी उत्पादक किसानों को अपनी उपज का अच्छा दाम मिल रहा है और नागरिकों को सस्ती और ताजी सब्जी मिल रही है।

‘किसान-बाजार’ में सब्जी उत्पादकों के सत्यापन, पंजीयन, काउंटर आवंटन, तौल-मशीन आदि की व्यवस्था की गई है। सब्जी की दर एक समिति तय करती है। यहां रोज लगभग डेढ़ टन सब्जी सुबह दो घण्टे में बिक जाती है।

छत्तीसगढ़ पहला राज्य है, जिसने 5 एच.पी. के पम्पों तक निःशुल्क विद्युत प्रदाय की सुविधा दी है।

प्रति पम्प 7 हजार 5 सौ यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने से प्रति किसानों को औसतन 31 हजार रुपये का वार्षिक लाभ मिल रहा है।

अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को प्रति किसान औसतन 50 हजार रुपये का लाभ इस योजना से मिल रहा है।

इतना ही नहीं, जहां परंपरागत बिजली देना संभव नहीं, वहां ‘‘सौर सुजला योजना’’ के माध्यम से दो वर्षों में 51 हजार सोलर पम्प देने की योजना शुरू की गई है।
इस योजना में 3 लाख से 5 लाख रूपये मूल्य का पम्प किसानों को केवल 7 हजार से 20 हजार रूपये तक में दिया जा रहा है। 12 हजार किसानों को इस योजना का लाभ मिल चुका है।

लघु एवं सीमांत किसानों को स्प्रिंकलर के लिये 11 हजार 800 रूपए तथा अन्य किसानों को 7 हजार 800 रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। इसी तरह ’’ड्रिप’’ के लिये भी 40 हजार से 60 हजार रूपए प्रति हेक्टेयर तक अनुदान दिया जा रहा है।

वर्ष 2016-17 में लक्षित 29 हजार हितग्राहियों की संख्या वित्तीय वर्ष 2017-18 में बढ़ाकर 1 लाख से अधिक की गई है।

माइक्रो-एरीगेशन के लिए नाबार्ड से 193 करोड़ रूपये का ऋण लेकर बड़े पैमाने पर सिंचाई सुविधा देने का निर्णय लिया गया है।

प्रदेश में सहकारी क्षेत्र में 4 शक्कर कारखाने स्थापित किए गए हैं। 12 हजार से अधिक किसानों को लगभग 33 हजार रूपये औसत की दर से गन्ना बोनस का भुगतान किया गया है।

परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत छह जिलों सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर नगर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा और कोरबा के गांवों में जैविक प्रमाणीकरण का अभियान चलाया जा रहा है। 9 हजार एकड़ क्षेत्र के 8 हजार से अधिक कृषकों को इसमें शामिल किया गया है।

जैविक खेती मिशन में 5 जिले गरियाबंद, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा एवं दंतेवाड़ा तथा 22 जिलों के एक-एक विकासखंड को पूर्ण जैविक बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।

’पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना में 59 करोड़ रूपए की लागत से 4 हजार 860 हेक्टेयर में ’’ड्रिप’’ तथा 23 हजार से अधिक हेक्टेयर में स्पिं्रकलर सिस्टम स्थापित किये गये हैं।

’’राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’’ के तहत नदी, नालों के किनारे 29 हजार से अधिक सेलो ट्यूबवेल का खनन किया गया है, साथ ही 15 करोड़ रूपए की लागत से 185 चेक डेम का निर्माण किया गया है।

’’किसान समृद्धि योजना’’ के तहत वर्ष 2016-17 में 5 हजार किसानों के खेतों में 14 करोड़ रूपए की लागत से नलकूप का खनन किया गया है।

’’शाकम्भरी योजना’’ में लघु सीमांत कृषकों को 8 हजार 300 कूप खोद कर दिए गए तथा 1 लाख 86 हजार से अधिक पंप दिए गए।

’’खरीफ क्रांति विस्तार योजना’’ में 4 लाख 76 हजार कृषकों को 108 करोड़ रूपये की लागत से बीज, फसल प्रदर्शन, एकीकृत कीटनाशक, बोरवेल, कृषि यंत्र आदि का लाभ दिया गया है।

किसानों को 58 लाख रूपये से अधिक निःशुल्क खसरा एवं नक्शा की प्रतिलिपि दी गई है।

प्रदेश का सिंचित रकबा 22 प्रतिशत से बढ़कर 34 प्रतिशत हो गया है।

’’अभियान लक्ष्य भागीरथी’’ के तहत 106 पुरानी तथा अपूर्ण योजनाओं को पूर्ण करने से 51 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन सिंचाई क्षमता बनी है।

’’प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’’ में जल की मांग और उपलब्धता के अंतर को कम करने के लिए जिला तथा राज्य स्तरों पर अलग-अलग सिंचाई योजना तैयार की गई है। ‘फास्ट ट्रेक’ प्रगति के लिए राज्य की 3 सिंचाई परियोजनाओं – खारंग, मनियारी और केलो का चयन किया गया है। वर्ष 2019 तक इन योजनाओं में 42 हजार 625 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता सृजित होगी।

 

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