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विशेष आलेख – स्वराज कुमार,

विकास की मुख्य धारा सहज-सुगम, सुरक्षित और बेहतरीन रास्तों से ही दूर-दूर तक और जन-जन तक पहुंच सकती है। पहुंच भी रही है। छत्तीसगढ़ में तरक्की के रास्ते सबके वास्ते तेजी से खुल रहे हैं। सबके साथ सबका विकास की भावना के अनुरूप केन्द्र के सहयोग से राज्य सरकार सड़कों के बेहतर नेटवर्क के विकास के लिए लगातार काम कर रही है।

शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में रक्त संचार के लिए जितना महत्व धमनियों और शिराओं का है, देश की सेहत को बेहतर बनाए रखने में उतना ही बड़ा योगदान अच्छी सड़कों का होता है। पक्के और बारहमासी रास्ते न सिर्फ गांवों, शहरों और राज्यों को एक-दूसरे को जोड़ते हैं, न सिर्फ इन रास्तों से माल परिवहन के जरिए व्यापार-व्यवसाय सहित रोजगार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि ये रास्ते लोगों के दिलों को भी आपस में जोड़कर रखते हैं। चिकित्सा सेवाएं, उपभोक्ता वस्तुएं, आम जनता तक आसानी से पहुंचती हैं। किसान अपनी उपज बाजारों तक आसानी से पहुंचा सकते हैं।

इसमें दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र की सरकार के प्रथम तीन वर्ष में पूरे देश में सड़क नेटवर्क के विकास और विस्तार का जो अभियान शुरू किया गया था, उसके फलस्वरूप अधिकांश राज्यों में जनता को पक्की और चौड़ी सड़कों में बारहमासी यातायात की बेहतरीन सुविधाएं मिलने लगी हैं। राज्यों की राजधानियों और वहां के जिला तथा विकासखण्ड मुख्यालयों के बीच दूरिया भले ही कम नहीं हुई हैं, लेकिन अच्छी सड़कों की वजह से वहां तक आने-जाने में समय की काफी बचत हो रही है। कामकाजी लोगों के लिए भी यह काफी लाभदायक साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं है।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सम्पर्क क्रांति की जिस अवधारणा पर बल दिया है, उसमें संचार क्रांति के तहत न सिर्फ मोबाइल फोन और रेल कनेक्टिविटी, बल्कि सड़क सम्पर्क का नेटवर्क भी शामिल है। राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों को बारहमासी सुगम यातायात की सुविधा देने के लिए लगभग 26 हजार 779 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इन सड़कों के जरिए आठ हजार 611 बसाहटों को मुख्य सड़कों के जरिए ब्लॉक मुख्यालयों और जिला मुख्यालयों से जोड़ दिया गया है। राज्य में रमन सरकार की यह तीसरी पारी है। आप पढ़ रहे हैं स्वराज कुमार का विशेष आलेख। विगत तेरह वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने भी सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। नदी-नालों में पुल निर्माण भी सड़क यातायात को बनाए रखने के लिए काफी जरूरी होता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पहले वर्ष 1978 से वर्ष 2000 तक लगभग 22 वर्ष में लोक निर्माण विभाग ने यहां सिर्फ 89 पुलों का निर्माण किया था।

अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2000 से 2003 तक तीन साल में लोक निर्माण विभाग द्वारा केवल 66 नग पुलों का निर्माण किया गया, जबकि वर्ष 2004 से 2017 तक यानी लगभग 14 वर्ष में विभाग ने 965 नग पुल बनाने का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इनमें से 209 पुल नक्सल प्रभावित सरगुजा इलाके में और 134 पुल बस्तर इलाके में बनाए गए हैं। इन 965 पुलों में बारह रेल्वे ओव्हर ब्रिज, तीन रेल्वे अंडर ब्रिज और दो फ्लाई ओव्हर भी शामिल हैं। वर्ष 2016-17 में 61 पुलों का निर्माण किया गया, जबकि आज की स्थिति में 182 पुलों का निर्माण प्रगति पर है। रमन सरकार के लिए राज्य के नक्सल हिंसा पीड़ित सुकमा जिले में दोरनापाल-कालीमेला मार्ग पर शबरी नदी में 500 मीटर लम्बे पुल का निर्माण करना एक बड़ा चैलेंज था।

राज्य सरकार ने इस चुनौती को स्वीकार किया। पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षा बलों के सहयोग से लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों और श्रमिकों ने मिलकर यह कार्य पूर्ण कर दिखाया। इसके निर्माण में ग्यारह साल लम्बा वक्त लगा, लेकिन निर्माण पूरा हुआ और इस वर्ष 2017 के प्रदेश व्यापी लोक सुराज अभियान में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने क्षेत्र की जनता के आग्रह पर वहां जाकर इसका लोकार्पण किया। डॉ. रमन सिंह ने इस बार के लोक सुराज अभियान को किसी भी प्रकार के लोकार्पण और शिलान्यास से अलग रखने का निर्णय लिया था, लेकिन राज्य के अंतिम छोर के इस जिले की कठिन परिस्थितियों में जिस उत्साह के साथ पुल का निर्माण हुआ और जिस आत्मीयता से लोगों ने मुख्यमंत्री को इसके लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया, उसे देखते हुए डॉ. सिंह ने मौके पर पहुंचकर पुल जनता को समर्पित किया। मुख्यमंत्री के शब्दों में-इस बार के लोक सुराज में सिर्फ एक लोकार्पण का कार्य हुआ, जो मेरे जीवन का सबसे सुखद अनुभव है। अभियान के तहत प्रदेश व्यापी दौरे के प्रथम दिवस पर तीन अप्रैल को जब मैं शबरी नदी पर छत्तीसगढ़ और ओड़िशा राज्यों को जोड़ने वाले इस नवनिर्मित पुल पर पहुंचा तो वहां दोनों राज्यों के हजारों आदिवासियों के उत्साह और उमंग को देखकर मैं भावुक हो उठा। सुकमा जिले में ही नगर पंचायत कोंटा से ओड़िशा जाने वाले मार्ग पर शबरी नदी में मोटूघाट पर भी एक पुल बनाने का काम शुरू किया गया है।

बहरहाल राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में भी कठिन से कठिन परिस्थितियों में सड़कों और पुल-पुलियों का निर्माण चल रहा है। गरियाबंद जिले में ओड़िशा की सरहद पर देवभोग क्षेत्र में कुम्हड़ई-झाखरपारा के रास्ते में तेल नदी सेतु, नहरगांव-नागाबुड़ा-बारूला मार्ग में पैरी नदी पर निर्मित पुल, सरईभदर-जड़जड़ा मार्ग में सोंढूर नदी पर निर्मित पुल, राजनांदगांव जिले में कोलबिर्रा-सिलपहरी मार्ग पर सोन नदी और खुज्जी नाले में निर्मित पुल और सांकरदहरा के पांगरीटोली-देवरीमार्ग पर शिवनाथ नदी में निर्मित उच्चस्तरीय पुल राज्य सरकार की प्राथमिकता का प्रमाण देते हैं। इसी कड़ी में बिलासपुर के चकरभाटा और राजधानी रायपुर के टाटीबंध में निर्मित रेल्वे ओव्हर ब्रिज ने यातायात को और भी आसान बना दिया है। राजधानी रायपुर में आमानाका के रेल्वे ओव्हर ब्रिज का चौड़ीकरण हो रहा है। दुर्ग-दल्लीराजहरा रेल लाईन पर मरोदा रेल्वे क्रांसिंग में भी रेल्वे ओव्हर ब्रिज का भी निर्माण किया जा रहा है। राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित मदनवाड़ा इलाके में भूरके नदी पर मदनवाड़ा-बसेली-सहपाल मार्ग में भी पुल निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। अरपा नदी में नगोई-नगपुरा मार्ग पर पुल निर्माण किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन का कार्य भी काफी तेजी से चल रहा है। मार्च 2004 तक राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या ग्यारह थी, जिनकी लम्बाई 2226 किलोमीटर थी। वर्तमान में इनकी संख्या 20 हो गई है और लम्बाई 3218 किलोमीटर तक पहुंच गई है। अप्रैल 2004 से वर्ष 2017 तक राज्य में 2440 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन आदि के लिए 14 हजार 157 करोड़ रूपए से ज्यादा के 94 निर्माण कार्य हाथ में लिए गए। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के अंतर्गत 1886 किलोमीटर, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में 863 किलोमीटर सड़कों के कार्य अप्रैल 2004 से मार्च 2014 के बीच मंजूर हुए। अब तक इनमें से 1338 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 163 के अंतर्गत भोपालपटनम से तरलागुड़ा के रास्ते तक चिंताबागू नदी और तारूड़नदी तथा एक बरसाती नाले पर तीन नग पुलों का निर्माण भी प्रगति पर है। इन्हें वर्ष 2018 तक पूर्ण करने की कार्य योजना बनाई गई है। भोपालपटनम से तरलागुड़ा तक और सुकमा से कोंटा तक पक्की और चौड़ी सड़कों का विस्तार किया जा रहा है। सरायपाली (जिला-महासमुंद) से जिला मुख्यालय रायगढ़ तक 81 किलोमीटर सड़क उन्नयन के लिए भी काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए 496 करोड़ रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति भी दी गई है। इसे मार्च 2018 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। नए राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 पर कटघोरा से शिवनगर 80 किलोमीटर सड़क उन्नयन के लिए 485 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इसमें से अब तक 30 किलोमीटर कांक्रीट सड़क और 32 किलोमीटर डीएलसी सड़क तैयार हो चुकी है। यह सड़क शिवनगर से आगे सरगुजा संभाग के मुख्यालय अम्बिकापुर को भी जोड़ेगी। लगभग 52 किलोमीटर के इस हिस्से के उन्नयन के लिए 335 करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं। जशपुर जिले के पत्थलगांव से सरगुजा जिले के अम्बिकापुर तक 96 किलोमीटर सड़क उन्नयन के लिए 625 करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं। उधर पत्थलगांव से कुनकुरी तक 60 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण के लिए 453 करोड़ रूपए की धन राशि मंजूर की गई है। राज्य के अनेक प्रमुख शहरों और कस्बों को भारी वाहनों के यातायात के दबाव से मुक्त करने के लिए बायपास सड़कों का भी निर्माण किया जा रहा है। आरंग, दुर्ग, राजनांदगांव, सरायपाली आदि इसके उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को 1526 किलोमीटर की 28 सड़कों का निर्माण मार्च 2018 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, जिन पर 12 हजार 266 करोड़ रूपए की लागत आ रही है। इनमें से अब तक 633 किलोमीटर कार्य पूर्ण हो चुका है। कुल 28 सड़कों में से छह सड़कें राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण की हैं, जिनकी लम्बाई 357 किलोमीटर और लागत 5445 करोड़ रूपए है। इनमें से 172 किलोमीटर का काम पूरा कर लिया गया है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों की चार सड़कों का निर्माण में मार्च 2018 तक पूर्ण करने लक्ष्य है। इनकी लम्बाई 187 किलोमीटर और लागत 708 करोड़ रूपए है। राजधानी और न्यायधानी के बीच त्वरित गति से यातायात के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के अंतर्गत रायपुर-बिलासपुर लगभग 110 किलोमीटर फोरलेन सड़क का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। इसे तीन अलग-अलग पैकेजों में स्वीकृत किया गया है।

मुम्बई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-53 (पुराना एनएच-6) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से आरंग होते हुए सरायपाली और आगे संबलपुर की ओर जाता है। इस मार्ग पर रायपुर से सरायपाली जाने में पहले करीब चार घंटे का समय लगना मामूली बात थी, लेकिन 150 किलोमीटर की इस सड़क को वर्ष 2011 में इसे फोरलेन बनाने का काम स्वीकृत किया गया और एक हजार 174 करोड़ रूपए की लागत से लगभग 147 किलोमीटर का कार्य पूर्ण भी कर लिया गया है। अब इस रास्ते से रायपुर-सरायपाली के बीच की दूरी चार घंटे से घटकर सिर्फ दो घंटे रह गई है। इस मार्ग पर रायपुर से लगभग 40 किलोमीटर आगे महानदी पर 50 वर्ष पुराने सिंगल लेन वाले पुल के स्थान पर एक विशाल पुल का निर्माण किया जा चुका है। महानदी पर ही रायगढ़ जिले में सूरजगढ़ के पास लगभग 1800 मीटर लंबे पुल का निर्माण किया गया है, जो छत्तीसगढ़ का सबसे लम्बा सेतु है। इसके बन जाने पर छत्तीसगढ़ के सरिया, बरमकेला और उधर ओड़िशा राज्य के रूचिदा सहित कई गांवों के बीच बारह मासी आवागमन आसान हो गया है।

रायपुर-दुर्ग के बीच 40 किलोमीटर के रास्ते में लगभग 27 किलोमीटर के चौड़ीकरण का कार्य भी 37 करोड़ 47 लाख रूपए की लागत से चल रहा है। यह कार्य दिसम्बर 2017 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। रायपुर-धमतरी फोरलेन सड़क निर्माण के लिए भी काम शुरू हो गया है। इसके लिए लगभग दो हजार करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं। यह सड़क आगे बस्तर संभाग के कांकेर होते हुए जगदलपुर तक जाएगी। इस प्रकार रायपुर से धमतरी होकर जगदलपुर तक करीब 300 किलोमीटर के रास्ते को यातायात की दृष्टि से सुगम और सुरक्षित बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मंशा है कि छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी राज्यों के बीच सड़क सम्पर्क और भी बेहतर हो। इसी कड़ी में उन्होंने राजधानी रायपुर को आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम बंदरगाह तक जोड़ने के लिए एक नए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के प्रस्ताव पर भी अपनी सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। इसके बन जाने पर रायपुर से विशाखापटनम की वर्तमान दूरी 600 किलोमीटर से घटकर 400 किलोमीटर रह जाएगी। इस नए प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग को छत्तीसगढ़ के कुरूद से नगरी (सिहावा) और ओड़िशा के नवरंगपुर से विशाखापट्नम तक चिन्हांकित किया है। प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग तीन राज्यों-छत्तीसगढ़, ओड़िशा और आंध्रप्रदेश को जोड़ेगा। कई आदिवासी बहुल इलाके इसके रास्ते में आएंगे। इन इलाकों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी तेजी आएगी।

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस आशय का प्रस्ताव केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी को फरवरी 2017 में भेजा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से भी प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया था। डॉ. रमन सिंह ने उनके आग्रह को सहर्ष स्वीकार कर लिया। यह नया मार्ग विशाखापट्नम, चिन्थलवलासा, विजयनगर, सलूर तथा ओड़िशा के कोरापुट, उमरकोट, बहेड़ा, दिघली होते हुए छत्तीसगढ़ के कुरूद के रास्ते रायपुर तक बनेगा। इसकी कुल लम्बाई 401 किलोमीटर होगी। छत्तीसगढ़ में यह मार्ग रायपुर से कुरूद, दिघली, नगरी, बोराई से लिखमा तक राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित मार्ग छत्तीसगढ़ में 132 किलोमीटर दो-लेन का होगा और 32 किलोमीटर सिंगल लेन सड़क बनेगी। वर्तमान में रायपुर से कुरूद तक 54 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग है। अब लगभग 110 किलोमीटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिलाने की सहमति छत्तीसगढ़ की ओर से दी जा चुकी है।

इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आम जनता की सुविधा की दृष्टि से एक नया और बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने राज्य बजट से लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित एक हजार से ज्यादा पुलों को टोल टैक्स से मुक्त करने की घोषणा की है। अगले वित्तीय वर्ष 2018 से उनका यह फैसला लागू हो जाएगा। इनमें से 965 पुल वर्ष 2004 से 2017 के बीच बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री को लोक निर्माण विभाग की एक समीक्षा बैठक में ऐसे पुलों को जिनकी सालाना टोल टैक्स वसूली पांच लाख रूपए के आस-पास है और उसमें भी काफी व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं, तो उन्होंने इन पुलों को टोल फ्री करने की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि डॉ. रमन सिंह ने वर्ष 2007-08 में 32 ऐसे पुलों को टोल वसूली से मुक्त कर दिया था, जिनमें सालाना पथकर वसूली पांच लाख रूपए से कम थी। लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत सभी निर्माणाधीन सड़कों और पुल-पुलियों की प्रगति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। वे स्वयं मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य सड़क विकास निगम भी प्रदेश में सड़कों को जाल बिछाने का काम तेजी से कर रहा है। निगम द्वारा 889 किलोमीटर की 27 सड़कों के कार्य हाथ में लिए गए हैं। इनके लिए 3238 करोड़ रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें से 648 किलोमीटर की 22 सड़कों के निर्माण के लिए एजेंसी भी तय कर दी गई है। कई सड़कों का निर्माण प्रगति पर है। राज्य में एशियन विकास बैंक (एडीबी) की की ऋण सहायता से 2200 करोड़ रूपए की 18 सड़कों का निर्माण चल रहा है। एडीबी की ऋण सहायता के तीसरे चरण के लिए छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम द्वारा 5500 करोड़ रूपए के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इस राशि से 32 सड़कों का निर्माण किया जाएगा। प्रदेश के कई शहरों में सुगम और सुरक्षित आवागमन के लिए फ्लाई ओव्हर और रेलवे ओव्हर ब्रिजों का भी निर्माण किया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष 2016-17 में लगभग 105 करोड़ रूपए की लागत से आठ ऐसे कार्यो को पूर्ण किया गया, जिनमें न्यायधानी बिलासपुर के चकरभाठा-बोदरी रेल लाईन में चकरभाटा के पास निर्मित रेलवे ओव्हर ब्रिज, सुकमा जिले में दोरनापाल-कालीमेला मार्ग पर शबरी नदी में, कांकेर जिले में पखांजूर-प्रतापपुर-कोयलीबेड़ा मार्ग पर कोटरी नदी में, राजनांदगांव जिले में मोहला-मानपुर-पांगरी-चौकी मार्ग पर शिवनाथ नदी में, इसी जिले के भर्रेगांव-रवेली-राजनांदगांव मार्ग पर शिवनाथ नदी में, गरियाबंद जिले के नाहरगांव-नागाबुड़ा-बारूला मार्ग पर पैरी नदी में, इसी जिले के देवभोग-कुम्हड़ई-झाखर पारा मार्ग पर तेल नदी में और धमतरी जिले के सरईभदर-जड़जड़ा-गरियाबंद मार्ग पर सोंढूर नदी में निर्मित पुल शामिल हैं। इसके अलावा जून 2018 तक लगभग 286 करोड़ रूपए की लागत से आठ बड़े पुलों का निर्माण भी पूर्ण करने का लक्ष्य है। इनमें राजधारी रायपुर के अंतर्गत काशीराम नगर के पास रिंग रोड नम्बर 1 के ऊपर फ्लाई ओव्हर, शंकर नगर में रायपुर-टिटलागढ़ रेल मार्ग पर ओव्हर ब्रिज तथा आमानाका स्थित रेल्वे ओव्हर ब्रिज के चौड़ीकरण सहित दुर्ग-दल्लीराजहरा रेल मार्ग पर मरौदा रेल्वे क्रॉसिंग में ओव्हर ब्रिज निर्माण, बिलासपुर जिले में हावड़ा-मुम्बई रेल मार्ग पर लाल खदान के पास रेल्वे ओव्हर ब्रिज निर्माण, जांजगीर-चांपा जिले में खोखसा रेल्वे ओव्हर ब्रिज निर्माण, बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग पर गौरेला रेल्वे ओव्हर ब्रिज निर्माण और सुकमा जिले में कोंटा नगर पंचायत से ओड़िशा पहुंच मार्ग पर शबरी नदी में मोटूघाट पर बनने वाला पुल शामिल हैं।

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