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सौजन्यः श्री रवि यादव, Mo. +91 9728720725

हिन्दी में सामान्य ज्ञान (Samanya Gyan in Hindi)

आज के पोस्ट का विषय है इतिहास सामान्य ज्ञान (History General Knowledge)

पेश है हिन्दी में इतिहास से संबंधित सामान्य ज्ञान (History General Knowledge in Hindi) के बारे में जानकारी।

History General Knowledge

चंद्रगुप्त मौर्य ने पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया था।

पाटलिपुत्र में चंद्रगुप्त का महल लकड़ी का बना था।

रुद्रदमन के जूनागढ़ अभिलेख से यह सिद्ध होता है कि चंद्रगुप्त का प्रभाव पश्चिम भारत तक फैला हुआ था।

भारत में सबसे पहले भारतीय साम्राज्य चंद्रगुप्त मौर्य ने स्थापित किया।

भाब्रू स्तंभ में अशोक ने स्वयं को मगध का सम्राट बताया है।

उत्तराखंड में अशोक का शिलालेख कालसी में है।

अशोक के शिलालेखों को पढ़ने वाला प्रथम अंग्रेज जेम्स प्रिंसेप था।

कलिंग युद्ध की विजय तथा क्षत्रियों का वर्णन 13वें शिलालेख में (XIII) में है।

सम्राट अशोक जनता के संपर्क में रहता था।

मुद्राराक्षस में चंद्रगुप्त मौर्य के लिए ‘वृषल’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

मास्की राज्यादेश में अशोक के व्यक्तिगत नाम का उल्लेख मिलता है।

श्रीनगर की स्थापना किस अशोक ने की थी।

अर्थशास्त्र में में शुद्रों के लिए ‘आर्य’ शब्द का प्रयोग हुआ है।

मेगास्थनीज ने पाटलिपुत्र को ‘पोलिब्रोथा’ कहा था।

मौर्य काल में सड़क निर्माण अधिकारी को ‘एग्रनोमाई’ कहा जाता था।

अशोक के विषय में जानकारी का महत्पूर्ण स्त्रोत शिलालेख हैं।

मेगास्थनीज ने कहा था कि ‘भारतीय लिखने की कला नहीं जानते’।

बिंदुसार की मृत्यु के समय अशोक उज्जैन प्रांत का गवर्नर था।

अशोक ने अपने पुत्र व पुत्री को बौद्ध धर्म के प्रचार व प्रसार हेतु श्रीलंका भेजा था।

कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र 15 अभिकरणों में विभाजित है।

अशोक का अभिलेख भारत के अलावा किस अफगानिस्तान भी पाया गया है।

प्रथम पृथक शिलालेख में शिलालेख में अशोक ने घोषणा की, ‘‘सभी मनुष्य मेरे बच्चे है’’।

अशोक के शिलालेख के लिए चुनार से पत्थर लिया जाता था।

मौर्यों का राजकोषीय वर्ष का आरंभ आषाढ़ (जुलाई) में होता था।

जैन ग्रंथ परिशिष्ट पर्व में में चंद्रगुप्त मौर्य के जैन धर्म अपनाने का उल्लेख मिलता है।

चंद्रगुप्त मौर्य का संघर्ष किस यूनानी शासक सेल्यूकस से से हुआ था।

एरियन ने चंद्रगुप्त मौर्य को सैंड्रोकोट्स नाम दिया था।

मुद्राराक्षस में चंद्रगुप्त मौर्य के लिए ‘कुलहीन’ शब्द का प्रयोग हुआ है।

चंद्रगुप्त मौर्य का निधन ई.पू. 297 हुआ था।

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