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प्रसिद्ध नाटक स्वप्नवासवदत्ता (Swapna Vasavadatta) के रचयिता महाकवि भास (Bhas) हैं। यहाँ पर हम आपके ज्ञानवर्धन हेतु पेश कर रहे हैं इस नाटक की कथा।

पुरुवंशीय राजा उदयन, स्वप्नवासवदत्ता (Swapna Vasavadatta) के नायक हैं। वे वत्स राज्य राज्य के राजा थे। उनकी राजधानी कौशाम्बी थी। आपको बता दें कि राजा उदयन के काल में राजगृह मगध राज्य की राजधानी थी और वहाँ का राजा अजातशत्रु का पुत्र दर्शक था। उज्जयिनी अवन्ति राज्य की राजधानी थी और राजा प्रद्योत उज्जयिनी के अधिपति थे। महाराज प्रद्योत के पास अत्यन्त विशाल सेना थी, इसी कारण से उन्हें महासेन के नाम से भी जाना जाता था।

महाराज उदयन अपने वीणा वादन के लिए प्रसिद्ध थे। उनके पास घोषवती नामक एक दिव्य वीणा थी। वे अपूर्व वीणा-वादन करते थे। एक बार प्रद्योत के मंत्री शालंकायन ने छल से उदयन को बंदी बना लिया। उदयन के वीणा-वादन की प्रसिद्धि राजा प्रद्योत ने भी सुना था। उन्होंने राजा उदयन को अपनी पुत्री वासवदत्ता को वीणा-वादन सिखाने के लिए आदेश दिया, जिसे राजा उदयन ने स्वीकार कर लिया। वीणा सीखने-सिखाने के दौरान उदयन और वासवदत्ता एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो गये।

इधर उदयन के अमात्य यौगन्धरायण उन्हें कैद से छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे। यौगन्धरायण ने चतुराई के साथ राजा उदयन को उज्जयिनी के कैदखाने से छुड़ा लिया। राजा उदयन के साथ ही वासवदत्ता भी कौशाम्बी आ गईं। राजा उदयन ने वासवदत्ता से विवाह कर लिया।

उदयन वासवदत्ता के प्रेम में इतने खोये रहने लगे कि उन्हें राज-कार्य की सुधि ही नहीं रही। इस स्थिति का लाभ उठा कर आरुणि नामक उनके क्रूर शत्रु ने उनके राज्य को उनसे छीन लिया।

आरुणि से उदयन के राज्य को वापस लेने के लिये उनके मन्त्री यौगन्धरायण और रुम्णवान् प्रयत्नशील हो गये। किन्तु बिना किसी अन्य राज्य की सहायता के आरुणि को परास्त नहीं किया जा सकता था। वासवदत्ता के पिता प्रद्योत उदयन से नाराज थे और यौगन्धरायण को उनसे किसी प्रकार की उम्मीद नहीं थी।

यौगन्धरायन को ज्योतिषियों के द्वारा पता चलता है कि मगध-नरेश की बहन पद्मावती का विवाह जिन नरेश से होगा वे चक्रवर्ती सम्राट हो जायेंगे। यौगन्धरायण ने सोचा कि यदि किसी प्रकार से पद्मावती का विवाह उदयन से हो जाये तो उदयन को अवश्य ही उनका वत्स राज्य आरुणि से वापस मिल जायेगा साथ ही वे चक्रवर्ती सम्राट भी बन जायेंगे।

यौगन्धरायण भलीभाँति जानते थे कि उदयन अपनी पत्नी वासवदत्ता से असीम प्रेम करते हैं और वे अपने दूसरे विवाह के लिये कदापि राजी नहीं होंगे। अतएव उन्होंने वासवदत्ता और रुम्णवान् के साथ मिलकर एक योजना बनाई। योजना के अनुसार उदयन को राजपरिवार तथा विश्वासपात्र सहयोगियों के साथ लेकर आखेट के लिये वन में भेजा गया जहाँ वे सभी लोग शिविर में रहने लगे। एक दिन, जब उदयन मृगया के लिये गए हुए थे, शिविर में आग लगा दी गई। उदयन के वापस लौटने पर रुम्णवान ने उन्हें बताया कि वासवदत्ता शिविर में लगी आग में फँस गईं थी और उन्हें बचाने के लिये यौगन्धरायण वहाँ घुसे जहाँ पर दोनों ही जल मरे। उदयन इस समाचार से अत्यन्त दुःखी हुए किन्तु रुम्णवान तथा अन्य अमात्यों ने अनेकों प्रकार से सांत्वना देकर उन्हें सम्भाला।

इधर यौगन्धरायन वासवदत्ता को साथ लेकर परिव्राजक के वेश में मगध राजपुत्री पद्मावती के पास पहुँच गए और प्रच्छन्न वासवदत्ता (अवन्तिका) को पद्मावती के पास धरोहर के रूप में रख दिया। अवन्तिका पद्मावती की विशेष अनुग्रह पात्र बन गईं। उन्होंने महाराज उदयन का गुणगान कर कर के पद्मावती को उनके प्रति आकर्षित कर लिया।

उदयन दूसरा विवाह नहीं करना चाहते थे किन्तु रुम्णवान् ने उन्हें समझा-बुझा कर पद्मावती से विवाह के लिये राजी कर लिया। इस प्रकार उदयन का विवाह पद्मावती के साथ हो गया। विवाह के पश्चात मगध-नरेश की सहायता से उदयन ने आरुणि पर आक्रमण कर दिया और उसे परास्त कर अपना राज्य वापस ले लिया। अन्त में अत्यन्त नाटकीय ढंग से यौगन्धरायण और वासवदत्ता ने स्वयं को प्रकट कर दिया। यौगन्धरायण ने अपनी धृष्टता एवं दुस्साहस के लिये क्षमा निवेदन किया। यही इस नाटक ‘स्वप्नवासवदत्ता’ की कथावस्तु है। एक दृश्य में उदयन समुद्रगृह में विश्राम करते रहते हैं। वे स्वप्न में ‘हा वासवदत्ता’, ‘हा वासवदत्ता’ पुकारते रहते हैं उसी समय अवन्तिका (वासवदत्ता) वहाँ पहुँ जाती हैं। वे उनके लटकते हुये हाथ को बिस्तर पर रख कर निकल जाती हैं साथ ही उदयन की नींद खुल जाती है किन्तु वे निश्चय नहीं कर पाते कि उन्होंने वास्तव में वासवदत्ता को देखा है अथवा स्वप्न में। इसी घटना के के कारण नाटक का नाम ‘स्वप्नवासवदत्ता’ रखा गया।

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