Archives for भारतीय सिनेमा
जानकारी श्री मुकेश कैन के सौजन्य से
- पहली हिन्दी फिल्म जिसमें अंग्रेजी गाना रखा गया – 1933 में बनी फिल्म “कर्मा” में पहली बार अंग्रेजी गाना रखा गया जिसे सुप्रसिद्ध अभिनेत्री देविका रानी ने गाया था, गाने के बोल थे “Now The Moon Her Light Has Shed”.
- पहले संगीत निर्देशक – 1931 में बनी पहली सवाक् फिल्म “आलम आरा” में म्युजिक दिया था फिरोजशाह मिस्त्री और बी. ईरानी ने
- पहला फिल्मी गीत – “दे दे खुदा के नाम पर प्यारे….” पहला गीत था जिसे फिल्म “आलम आरा” के लिए डब्ल्यु. एम. खान ने गाया था।
- पहला डबल रोल – ए. सालुंके ने दादा साहब फाल्के की फिल्म “लंका दहन” के लिए पहली बार राम और सीता दोनों का रोल किया था।
- सिर्फ एक एक्टर और एक सेट वाली फिल्म – सुनील दत्त ने सन् 1964 में फिल्म “यादें” बनाई थी, जिसमें सिर्फ वे ही अकेले एक्टर थे और फिल्म सिर्फ एक सेट में फिल्माई गई थी।
- पहला प्लेबैक – सन् 1935 में आर.सी. बोराल ने पहली बार फिल्म “धूप छाँव” में प्लेबैक सिस्टम का प्रयोग किया। गीत था पारुल घोष, सुप्रोवा सरका और हरिमति द्वारा गाया गया कोरस “मैं खुश होना चाहूँ…”
- पहली महिला संगीतकार – सन् 1935 में नरगिस की माँ जद्दन बाई ने फिल्म “तलाश-ए-हक़” बनाया जिसका संगीत उन्होंने स्वयं दिया था। उसी वर्ष दूसरी महिला सरस्वती देवी ने बॉम्बे टाकीज की फिल्म “जवानी की हवा” के लिए संगीत दिया।
- बगैर गानों वाली पहली फिल्म – सन् 1937 में जे.बी.एच. वाडिया ने फिल्म “नौजवान” बनाई थी जिसमें एक भी गाना नहीं था।
- पहला फिल्म पोस्टर – सन् 1923 में बाबूराव पेंटर ने फिल्म “माया बाजार”, जिसे “वत्सला हरण” के नाम से भी जाना जाता है, की पब्लिसिटी के लिए पहली बार फिल्म पोस्टर का प्रयोग किया।
- पहली डाकुमेंटरी फिल्म – सन् 1901 एच.एस. भटवडेकर ने डॉ. आर.पी. पंराजपे के सम्मान में की गई स्वागत समारोह को फिल्माया था, जो कि भारत की पहली डाकुमेंटरी फिल्म है।
कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली बाम्बे स्टुडिओ के प्रयोगशाला सहायक (laboratory assistant) थे। उन ही दिनों में नज़ाम-उल-हुसैन बाम्बे टाकीज के हीरो हुआ करते थे और नायिका होती थीं देविकारानी जो कि बाम्बे टाकीज के मालिक हिमांशु राय की पत्नी थीं। किस्सा यों है कि बाम्बे टाकीज में फिल्म जीवन नैया बन रही थी और फिल्म में हीरो (नज़ाम-उल-हुसैन) हीरोइन (देविका रानी) को फिल्म की कहानी में भगाने के स्थान पर सचमुच ही भगा ले गये। हिमांशु राय भी कम न थे, खोजबीन करवा के दोनों को पकड़ मँगवाया। देविकारानी को तो क्षमा कर दिया उन्होंने पर नज़ाम-उल-हुसैन को बाम्बे टाकीज से निकाल बाहर कर दिया। अब समस्या यह थी कि हीरो कहाँ से लायें? अचानक उनके जेहन में बिजली सी कौंधी। प्रयोगशाला सहायक कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली नौजवान भी है और खूबसूरत भी, हीरो का रोल अवश्य फब जायेगा उसे। आदेश दे दिया उसे कि हीरो का रोल करो। बेचारे कुमुदलाल ने बहुत कहा कि मुझे अभिनय का क ख ग भी नहीं आता पर उनकी एक न चली, नौकरी जो करनी थी। कुमुदलाल का फिल्मी नाम भी रख दिया हिमांशुराय ने – फिल्मी नाम था अशोक कुमार (Ashok Kumar)। फिल्म बनी और चली भी, ये बात अलग है कि फिल्म देविकारानी की वजह से ही चली पर अशोक कुमार बन गये हीरो। तो हुज़ूर जिसके किस्मत में हीरो बनना लिखा होता है उसे बनना ही पड़ता है|
रफी साहब के जन्मदिन पर विशेष
वर्ष 1924 के आज ही तारीख अर्थात् 24 दिसम्बर को एक ऐसे महान गायक का उदय हुआ था जिनकी मधुर आवाज आज भी हमारे कानों में गूँजती रहती है। सुमधुर कण्ठस्वर के स्वामी तथा महान गायक मोहम्मद रफी ने कितने गाने गाये हैं इसका हिसाब ही नहीं है। गायन के लिये 23 बार उन्हें फिल्म फेयर एवार्ड मिला था। उनके कंठस्वर से ही प्रेरणा पा कर ही महेन्द्र कपूर, सोनू निगम जैसे अनेक गायकों ने गायन के क्षेत्र में सफलता अर्जित की।
सामान्यतः पार्श्वगायक प्लेबैक सिंगर उन लोगों के लिए गाने गाते हैं जो गायन के क्षेत्र में सिद्धहस्त नहीं होते। किन्तु मोहम्मद रफी साहब ने तो किशोर कुमार जैसे धुरंधर पार्श्वगायक के लिए भी गाने गाये हैं। किशोर कुमार एक अच्छे गायक और अभिनेता होने के साथ ही साथ निर्माता, निर्देशक और संगीतकार भी थे। अपने गाने स्वयं ही गाया करते थे वे। पर संगीतकार ओ.पी. नैयर रफ़ी साहब के की आवाज से इतने प्रभावित थे कि फिल्म रागिनी (1958) के शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीत ‘मन मोरा बावरा गाये…..’ को किशोर कुमार के लिये रफ़ी साहब से ही गवाया था। सन् 1958 में ही फिल्म शरारत में भी मोहम्मद रफ़ी ने फिर से एक बार किशोर कुमार के लिये गाना गाया था। गीत के बोल हैं ‘अजब है दास्ताँ तेरी ऐ जिंदगी…..’। और आखरी बार सन् 1964 में मोहम्मद रफ़ी ने फिल्म बाग़ी शहज़ादा में भी किशोर कुमार के लिये गाया था (इस बात का खेद है कि गीत के बोल मुझे याद नहीं है)।
आवाज दे कहाँ है
दुनिया मेरी जवाँ है
आबाद मेरे दिल में
उम्मीद का जहां है
दुनिया मेरी जवाँ है…
आ रात जा रही है
यूँ जैसे चाँदनी की
बारात जा रही है
चलने को अब फलक से
तारों का कारवां है
दुनिया मेरी जवाँ है…
किस्मत पे छा रही है
क्यूँ रात की सियाही
वीरान मेरी नींदें
तारों से ले गवाही
बरबाद मैं यहाँ हूँ
आबाद तू वहाँ है
दुनिया मेरी जवाँ है…
फिल्म – अनमोल घड़ी ….. गायक – नूरजहां, सुरेन्द्र
http://www.youtube.com/watch?v=NpPiFyG6qNg
ओ गोरिया रे
तेरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
नैया तो हमारा घर आँगना
इसी से है पाना और माँगना
गोरी ये दुआएँ करना जरूर
माँझी से नैया कभी हो नहीं दूर
ओ गोरिया रे…
सबको किनारे पहुँचाएगा
माँझी तो किनारा तभी पाएगा
गहरी नदी का ओर ना छोर
लहरों से जियादा मनवा में शोर
ओ गोरिया रे…
फिल्म – नैया ….. गायक – येशुदास
छोड़ कर तेरे प्यार का दामन
ये बता दे के हम किधर जाएँ
हमको डर है के तेरी बाहों में
हम खुशी से ना आज मर जाएँ
छोड़ कर तेरे प्यार का दामन…
मिल गए आज काफिले दिल के
हम खड़े हैं करीब मंजिल के
मुस्कुरा कर तो तुमने देख लिया
मिट गए हँस के सब गिले दिल के
कितनी प्यारी हैं ये हसीं घड़ियाँ
इनसे कह दो यहीं ठहर जाएँ
छोड़ कर तेरे प्यार का दामन…
तेरे कदमों में जिंदगी रख दूँ
अपनी आँखों की रोशनी रख दूँ
तू अगर खुश हो मैं तेरे दिल में
अपने दिल की हर इक खुशी रख दूँ
मेरे हमदम मेरी खुशी ये है
तू नजर आए हम जिधर जाएँ
छोड़ कर तेरे प्यार का दामन…
फिल्म – वो कौन थी ….. गायक – लता मंगेषकर, मोहम्मद रफी ….. संगीतकार – मदन मोहन
ये आँसू मेरे दिल की जुबान हैं
मैं रो दूँ तो रो दे ये आँसू
मैं हँस दूँ तो हँस दे ये आँसू
ये आँसू मेरे दिल की जुबान हैं…
आँख से टपकी जो चिंगारी
हर आँसू में छवि तुम्हारी
चीर के मेरे दिल को देखो
बहते लहू में प्रीत तुम्हारी
ये जीवन जैसे सुलगा तूफान है
ये आँसू मेरे दिल की जुबान हैं…
जीवन पथ पर जीवन साथी
साथ चले हो मुँह ना मोड़ो
दर्द-ओ-गम के दोराहे पर
मुझको तड़पता यूँ ना छोड़ो
ये नगमा मेरे गम का बयान है
-
फिल्म – हमराही ….. गायक – मोहम्मद रफी ….. संगीतकार – शंकर जयकिशन
जहाँ डाल डाल पर सोने की
चिड़िया करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा
जहाँ सत्य अहिंसा और धर्म का
पग पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा
ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि
जपते प्रभु नाम की माला
जहाँ हर बालक इक मोहन है
और राधा हर इक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आकर
डाले अपना डेरा
वो भारत देश है मेरा
अलबेलों की इस धरती के
त्यौहार भी है अलबेले
कहीं दीवाली की जगमग है
कहीं है होली के मेले
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का
चारों ओर बसेरा
वो भारत देश है मेरा
फिल्म – सिकन्दर-ए-आज़म ….. गायक – मोहम्मद रफी
रात और दिन दिया जले
मेरे मन में फिर भी अँधियारा है
जाने कहाँ है वो साथी
तू जो मिले जीवन उजियारा है
रात और दिन दिया जले…..
पग पग मन मेरा ठोकर खाय
चाँद सूरज भी राह ना दिखाय
ऐसा उजाला कोई मन में समाय
जिससे पिया के दरशन मिल जाय
रात और दिन दिया जले…..
गहरा ये भेद कोई मुझको बताय
किसने किया है मुझ पर अन्याय
जिसका हो दीप वो सुख नहिं पाय
जोत दिये की दूजे घर को सजाय
रात और दिन दिया जले…..
खुद नहीं जानूँ ढूँढे किसको नज़र
कौन दिशा है मेरे मन की डगर
कितना अजब है ये दिल का सफर
नदिया में आए जाए जैसे लहर
रात और दिन दिया जले…..
फिल्म – रात और दिन ….. गायक – लता मंगेषकर ….. संगीतकार – शंकर जयकिशन
