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मुकेश कैन द्वारा प्रेषित स्वरचित शेर

गम है तुम्हे क्या बताएँ, अपनो के दिए है अपनों के हैं सताए
गम नहीं के लोगों ने मुझे लूटा, गम है के अपनों ने मुझे लूटा

पत्थर की दुनिया है, जज्बात नहीं समझती
दिल लगा तो लिया, मगर वो बात नहीं समझती
तन्हा तो चाँद भी है, इतने सितारों के बीच में
मगर इस चाँद का दर्द, बेवफा रात नहीं समझती

मिले थे उनसे ऐसे के, जैसे कभी बिछडेंगे नहीं
आज बिछड़े है ऐसे के, जैसे कभी मिले ही नहीं

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