1857 की क्रान्ति (1857 revolt facts in Hindi)

  • 1857 की क्रान्ति भारत से अंग्रजी सरकार को हटाने का पहला संगठित प्रयास था।
  • 1857 की क्रान्ति के समय भारत का गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग था।
  • इस क्रान्ति के अनेक कारण थे जिनमें राजनैतिक, आर्थिक, प्रशासनिक, सैनिक, सामाजि तथा धार्मिक कारण सम्मिलित थे, किन्तु मुख्य कारण था अंग्रेजों की उपनिवेशवादी नीतियाँ तथा उनके द्वारा भारत का शोषण।
  • 1857 की क्रान्ति का तात्कालिक कारण अंग्रेजों के द्वारा भारतीय सैनिकों से चर्बीयुक्त कारतूसों का प्रयोग करवाना था।
  • 29 मार्च 1857 के दिन से यह विद्रोह पश्चिम बंगाल के बैरकपुर छावनी से आरम्भ हुआ।
  • मेरठ छावनी में मंगल पांडे ने चर्बीयुक्त कारतूसों के विरोध में आवाज उठायी।
  • 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को फाँसी दे दी गई।
  • मंगल पांडे की फाँसी के बाद 1857 का विद्रोह प्रचण्ड वेग से पूरे देश में फैल गया।
  • 1857 का विद्रोह का नेतृत्व दिल्ली में जनरल बख्त खां और बहादुरशाह जफर ने, लखनऊ में बेगम हजरत महल और बिरजिस कादिर ने, कानपुर में नाना साहब ने, झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई ने, ग्वालियर में तात्या टोपे ने, फैजाबाद में मौलवी अहमद उल्ला ने, बरेली में खान बहादुर ने और बिहार में कुँवर सिंह ने किया।
  • इस विद्रोह का सामना दिल्ली में लेफ्टिनेंट हडसन, लेफ्टिनेंट विलोबा, जॉन निकोलसन ने, लखनऊ में जेम्स आउट्रम, हेनरी लारेंस, ब्रिगेडियर इंग्लिश, हेनरी हेवलॉक, सर कोलि कैम्पबेल ने, झाँसी में सर ह्यूज ने, कानपुर में कोलिन कैम्पबेल, सर ह्यू व्हीलर और बनारस में कर्नल जेम्स नाल ने किया।
  • विद्रोह इसलिए असफल रहा क्योंकि विद्रोहदर्ताओं के नेताओं में सामंजस्य का अभाव था।
  • सिंधिया, निजाम, भोपाल के नवाब आदि ने अंग्रेजों का साथ दिया था।
  • विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत का शासन ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हाथों से अपने हाथ में ले लिया और सेना का पुनर्गठन करके सेना भारतीयों की संख्या कम कर दिया।
  • 1857 की क्रान्ति के बाद ही अंग्रेजों में “फूट डालो और राज करो” नीति अपनाई।