Archives for CG News

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में किये जाने वाले सराहनीय कार्य

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह ने किसानों के हित में ऐसी व्यूह रचना की है कि अब यह चिंता करनने की आवश्यकता ही नहीं रह गई है कि कि बीज कहाँ से आएगा, खाद कैसे मिलेगी, दवा कैसे मिलेगी, बिजली कैसे मिलेगी?

श्री रमन सिंह ने किसानों की सुविधा के लिए योजनाओं का ऐसा ताना-बाना बुना है, कि किसानों को हर चीज, सही समय पर, बिना किसी दिक्कत के मिल सके।

7 लाख 45 हजार क्विंटल बीजों का तथा 10 लाख 65 हजार मीट्रिक टन खाद का इंतजाम भी किया गया है।

किसानों को पहले 14 प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण लेना पड़ता था, जो ऊँची दर होने के कारण, किसान ब्याज पटाने के चक्कर में परेशान रहते थे और डिफाल्टर होने से उनकी प्रगति रूक जाती थी। महंगे कर्ज के दुष्चक्र को वर्तमान सरकार ने तोड़ दिया है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने लगातार ब्याज दर कम की है और लगभग पांच साल से बिना ब्याज के अल्पकालिक कृषि ऋण दे रही है, जिसका लाभ हर साल 11 लाख किसानों को मिलता है।

छत्तीसगढ़, देश का पहला राज्य बनाया गया, जिसने किसानों को ब्याज मुक्त ऋण देने की व्यवस्था की थी।

छत्तीसगढ़ में किसान पहले सिर्फ 150 करोड़ रूपए का ऋण ही लेते थे, लेकिन ब्याज मुक्त ऋण मिलने के बाद धीरे-धीरे परिवर्तन आया आज 3 हजार करोड़ रूपए से अधिक कृषि ऋण किसान उठा रहे हैं।

इससे पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में किसानों की अर्थ-व्यवस्था ने कितनी ऊंची छलांग लगाई है। 20 गुना अधिक ऋण लेने से उनके उत्पादन का मूल्य भी कई गुना अधिक बढ़ा है।

धान छत्तीसगढ़ की जान है। इसलिए श्री सिंह ने धान खरीदी की शानदार और पारदर्शी व्यवस्था की है, हमारी ’’किसान हितकारी व्यवस्था’’ की तारीफ पूरे देश में हो रही है।

1.989 उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी की व्यवस्था है।

विगत 13 वर्षों में 6 करोड़ 22 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और किसानों को करीब 64 हजार 730 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया।

कृषि लागत कम करने के उपाय, अच्छी फसल, खरीदी की शानदार व्यवस्था आदि के कारण किसानों में समृद्धि बढ़ी है। किसानों की जिंदगी में सुखद बदलाव आया है।

धमतरी में प्रदेश का पहला ‘किसान-बाजार’ शुरू किया गया है। जिला प्रशासन की पहल पर ऐसी व्यवस्था की गई है, जिसमें उत्पादक और ग्राहक को नजदीक लाया गया है और मध्यस्थ को हटा दिया गया है। इस तरह सब्जी उत्पादक किसानों को अपनी उपज का अच्छा दाम मिल रहा है और नागरिकों को सस्ती और ताजी सब्जी मिल रही है।

‘किसान-बाजार’ में सब्जी उत्पादकों के सत्यापन, पंजीयन, काउंटर आवंटन, तौल-मशीन आदि की व्यवस्था की गई है। सब्जी की दर एक समिति तय करती है। यहां रोज लगभग डेढ़ टन सब्जी सुबह दो घण्टे में बिक जाती है।

छत्तीसगढ़ पहला राज्य है, जिसने 5 एच.पी. के पम्पों तक निःशुल्क विद्युत प्रदाय की सुविधा दी है।

प्रति पम्प 7 हजार 5 सौ यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने से प्रति किसानों को औसतन 31 हजार रुपये का वार्षिक लाभ मिल रहा है।

अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को प्रति किसान औसतन 50 हजार रुपये का लाभ इस योजना से मिल रहा है।

इतना ही नहीं, जहां परंपरागत बिजली देना संभव नहीं, वहां ‘‘सौर सुजला योजना’’ के माध्यम से दो वर्षों में 51 हजार सोलर पम्प देने की योजना शुरू की गई है।
इस योजना में 3 लाख से 5 लाख रूपये मूल्य का पम्प किसानों को केवल 7 हजार से 20 हजार रूपये तक में दिया जा रहा है। 12 हजार किसानों को इस योजना का लाभ मिल चुका है।

लघु एवं सीमांत किसानों को स्प्रिंकलर के लिये 11 हजार 800 रूपए तथा अन्य किसानों को 7 हजार 800 रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। इसी तरह ’’ड्रिप’’ के लिये भी 40 हजार से 60 हजार रूपए प्रति हेक्टेयर तक अनुदान दिया जा रहा है।

वर्ष 2016-17 में लक्षित 29 हजार हितग्राहियों की संख्या वित्तीय वर्ष 2017-18 में बढ़ाकर 1 लाख से अधिक की गई है।

माइक्रो-एरीगेशन के लिए नाबार्ड से 193 करोड़ रूपये का ऋण लेकर बड़े पैमाने पर सिंचाई सुविधा देने का निर्णय लिया गया है।

प्रदेश में सहकारी क्षेत्र में 4 शक्कर कारखाने स्थापित किए गए हैं। 12 हजार से अधिक किसानों को लगभग 33 हजार रूपये औसत की दर से गन्ना बोनस का भुगतान किया गया है।

परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत छह जिलों सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर नगर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा और कोरबा के गांवों में जैविक प्रमाणीकरण का अभियान चलाया जा रहा है। 9 हजार एकड़ क्षेत्र के 8 हजार से अधिक कृषकों को इसमें शामिल किया गया है।

जैविक खेती मिशन में 5 जिले गरियाबंद, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा एवं दंतेवाड़ा तथा 22 जिलों के एक-एक विकासखंड को पूर्ण जैविक बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।

’पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना में 59 करोड़ रूपए की लागत से 4 हजार 860 हेक्टेयर में ’’ड्रिप’’ तथा 23 हजार से अधिक हेक्टेयर में स्पिं्रकलर सिस्टम स्थापित किये गये हैं।

’’राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’’ के तहत नदी, नालों के किनारे 29 हजार से अधिक सेलो ट्यूबवेल का खनन किया गया है, साथ ही 15 करोड़ रूपए की लागत से 185 चेक डेम का निर्माण किया गया है।

’’किसान समृद्धि योजना’’ के तहत वर्ष 2016-17 में 5 हजार किसानों के खेतों में 14 करोड़ रूपए की लागत से नलकूप का खनन किया गया है।

’’शाकम्भरी योजना’’ में लघु सीमांत कृषकों को 8 हजार 300 कूप खोद कर दिए गए तथा 1 लाख 86 हजार से अधिक पंप दिए गए।

’’खरीफ क्रांति विस्तार योजना’’ में 4 लाख 76 हजार कृषकों को 108 करोड़ रूपये की लागत से बीज, फसल प्रदर्शन, एकीकृत कीटनाशक, बोरवेल, कृषि यंत्र आदि का लाभ दिया गया है।

किसानों को 58 लाख रूपये से अधिक निःशुल्क खसरा एवं नक्शा की प्रतिलिपि दी गई है।

प्रदेश का सिंचित रकबा 22 प्रतिशत से बढ़कर 34 प्रतिशत हो गया है।

’’अभियान लक्ष्य भागीरथी’’ के तहत 106 पुरानी तथा अपूर्ण योजनाओं को पूर्ण करने से 51 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन सिंचाई क्षमता बनी है।

’’प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’’ में जल की मांग और उपलब्धता के अंतर को कम करने के लिए जिला तथा राज्य स्तरों पर अलग-अलग सिंचाई योजना तैयार की गई है। ‘फास्ट ट्रेक’ प्रगति के लिए राज्य की 3 सिंचाई परियोजनाओं – खारंग, मनियारी और केलो का चयन किया गया है। वर्ष 2019 तक इन योजनाओं में 42 हजार 625 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता सृजित होगी।

 

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

सबके वास्ते तेजी से खुल रहे तरक्की के रास्ते

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

विशेष आलेख – स्वराज कुमार,

विकास की मुख्य धारा सहज-सुगम, सुरक्षित और बेहतरीन रास्तों से ही दूर-दूर तक और जन-जन तक पहुंच सकती है। पहुंच भी रही है। छत्तीसगढ़ में तरक्की के रास्ते सबके वास्ते तेजी से खुल रहे हैं। सबके साथ सबका विकास की भावना के अनुरूप केन्द्र के सहयोग से राज्य सरकार सड़कों के बेहतर नेटवर्क के विकास के लिए लगातार काम कर रही है।

शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में रक्त संचार के लिए जितना महत्व धमनियों और शिराओं का है, देश की सेहत को बेहतर बनाए रखने में उतना ही बड़ा योगदान अच्छी सड़कों का होता है। पक्के और बारहमासी रास्ते न सिर्फ गांवों, शहरों और राज्यों को एक-दूसरे को जोड़ते हैं, न सिर्फ इन रास्तों से माल परिवहन के जरिए व्यापार-व्यवसाय सहित रोजगार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि ये रास्ते लोगों के दिलों को भी आपस में जोड़कर रखते हैं। चिकित्सा सेवाएं, उपभोक्ता वस्तुएं, आम जनता तक आसानी से पहुंचती हैं। किसान अपनी उपज बाजारों तक आसानी से पहुंचा सकते हैं।

इसमें दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र की सरकार के प्रथम तीन वर्ष में पूरे देश में सड़क नेटवर्क के विकास और विस्तार का जो अभियान शुरू किया गया था, उसके फलस्वरूप अधिकांश राज्यों में जनता को पक्की और चौड़ी सड़कों में बारहमासी यातायात की बेहतरीन सुविधाएं मिलने लगी हैं। राज्यों की राजधानियों और वहां के जिला तथा विकासखण्ड मुख्यालयों के बीच दूरिया भले ही कम नहीं हुई हैं, लेकिन अच्छी सड़कों की वजह से वहां तक आने-जाने में समय की काफी बचत हो रही है। कामकाजी लोगों के लिए भी यह काफी लाभदायक साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं है।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सम्पर्क क्रांति की जिस अवधारणा पर बल दिया है, उसमें संचार क्रांति के तहत न सिर्फ मोबाइल फोन और रेल कनेक्टिविटी, बल्कि सड़क सम्पर्क का नेटवर्क भी शामिल है। राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों को बारहमासी सुगम यातायात की सुविधा देने के लिए लगभग 26 हजार 779 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इन सड़कों के जरिए आठ हजार 611 बसाहटों को मुख्य सड़कों के जरिए ब्लॉक मुख्यालयों और जिला मुख्यालयों से जोड़ दिया गया है। राज्य में रमन सरकार की यह तीसरी पारी है। आप पढ़ रहे हैं स्वराज कुमार का विशेष आलेख। विगत तेरह वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने भी सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। नदी-नालों में पुल निर्माण भी सड़क यातायात को बनाए रखने के लिए काफी जरूरी होता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पहले वर्ष 1978 से वर्ष 2000 तक लगभग 22 वर्ष में लोक निर्माण विभाग ने यहां सिर्फ 89 पुलों का निर्माण किया था।

अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2000 से 2003 तक तीन साल में लोक निर्माण विभाग द्वारा केवल 66 नग पुलों का निर्माण किया गया, जबकि वर्ष 2004 से 2017 तक यानी लगभग 14 वर्ष में विभाग ने 965 नग पुल बनाने का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इनमें से 209 पुल नक्सल प्रभावित सरगुजा इलाके में और 134 पुल बस्तर इलाके में बनाए गए हैं। इन 965 पुलों में बारह रेल्वे ओव्हर ब्रिज, तीन रेल्वे अंडर ब्रिज और दो फ्लाई ओव्हर भी शामिल हैं। वर्ष 2016-17 में 61 पुलों का निर्माण किया गया, जबकि आज की स्थिति में 182 पुलों का निर्माण प्रगति पर है। रमन सरकार के लिए राज्य के नक्सल हिंसा पीड़ित सुकमा जिले में दोरनापाल-कालीमेला मार्ग पर शबरी नदी में 500 मीटर लम्बे पुल का निर्माण करना एक बड़ा चैलेंज था।

राज्य सरकार ने इस चुनौती को स्वीकार किया। पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षा बलों के सहयोग से लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों और श्रमिकों ने मिलकर यह कार्य पूर्ण कर दिखाया। इसके निर्माण में ग्यारह साल लम्बा वक्त लगा, लेकिन निर्माण पूरा हुआ और इस वर्ष 2017 के प्रदेश व्यापी लोक सुराज अभियान में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने क्षेत्र की जनता के आग्रह पर वहां जाकर इसका लोकार्पण किया। डॉ. रमन सिंह ने इस बार के लोक सुराज अभियान को किसी भी प्रकार के लोकार्पण और शिलान्यास से अलग रखने का निर्णय लिया था, लेकिन राज्य के अंतिम छोर के इस जिले की कठिन परिस्थितियों में जिस उत्साह के साथ पुल का निर्माण हुआ और जिस आत्मीयता से लोगों ने मुख्यमंत्री को इसके लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया, उसे देखते हुए डॉ. सिंह ने मौके पर पहुंचकर पुल जनता को समर्पित किया। मुख्यमंत्री के शब्दों में-इस बार के लोक सुराज में सिर्फ एक लोकार्पण का कार्य हुआ, जो मेरे जीवन का सबसे सुखद अनुभव है। अभियान के तहत प्रदेश व्यापी दौरे के प्रथम दिवस पर तीन अप्रैल को जब मैं शबरी नदी पर छत्तीसगढ़ और ओड़िशा राज्यों को जोड़ने वाले इस नवनिर्मित पुल पर पहुंचा तो वहां दोनों राज्यों के हजारों आदिवासियों के उत्साह और उमंग को देखकर मैं भावुक हो उठा। सुकमा जिले में ही नगर पंचायत कोंटा से ओड़िशा जाने वाले मार्ग पर शबरी नदी में मोटूघाट पर भी एक पुल बनाने का काम शुरू किया गया है।

बहरहाल राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में भी कठिन से कठिन परिस्थितियों में सड़कों और पुल-पुलियों का निर्माण चल रहा है। गरियाबंद जिले में ओड़िशा की सरहद पर देवभोग क्षेत्र में कुम्हड़ई-झाखरपारा के रास्ते में तेल नदी सेतु, नहरगांव-नागाबुड़ा-बारूला मार्ग में पैरी नदी पर निर्मित पुल, सरईभदर-जड़जड़ा मार्ग में सोंढूर नदी पर निर्मित पुल, राजनांदगांव जिले में कोलबिर्रा-सिलपहरी मार्ग पर सोन नदी और खुज्जी नाले में निर्मित पुल और सांकरदहरा के पांगरीटोली-देवरीमार्ग पर शिवनाथ नदी में निर्मित उच्चस्तरीय पुल राज्य सरकार की प्राथमिकता का प्रमाण देते हैं। इसी कड़ी में बिलासपुर के चकरभाटा और राजधानी रायपुर के टाटीबंध में निर्मित रेल्वे ओव्हर ब्रिज ने यातायात को और भी आसान बना दिया है। राजधानी रायपुर में आमानाका के रेल्वे ओव्हर ब्रिज का चौड़ीकरण हो रहा है। दुर्ग-दल्लीराजहरा रेल लाईन पर मरोदा रेल्वे क्रांसिंग में भी रेल्वे ओव्हर ब्रिज का भी निर्माण किया जा रहा है। राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित मदनवाड़ा इलाके में भूरके नदी पर मदनवाड़ा-बसेली-सहपाल मार्ग में भी पुल निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। अरपा नदी में नगोई-नगपुरा मार्ग पर पुल निर्माण किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन का कार्य भी काफी तेजी से चल रहा है। मार्च 2004 तक राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या ग्यारह थी, जिनकी लम्बाई 2226 किलोमीटर थी। वर्तमान में इनकी संख्या 20 हो गई है और लम्बाई 3218 किलोमीटर तक पहुंच गई है। अप्रैल 2004 से वर्ष 2017 तक राज्य में 2440 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन आदि के लिए 14 हजार 157 करोड़ रूपए से ज्यादा के 94 निर्माण कार्य हाथ में लिए गए। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के अंतर्गत 1886 किलोमीटर, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में 863 किलोमीटर सड़कों के कार्य अप्रैल 2004 से मार्च 2014 के बीच मंजूर हुए। अब तक इनमें से 1338 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 163 के अंतर्गत भोपालपटनम से तरलागुड़ा के रास्ते तक चिंताबागू नदी और तारूड़नदी तथा एक बरसाती नाले पर तीन नग पुलों का निर्माण भी प्रगति पर है। इन्हें वर्ष 2018 तक पूर्ण करने की कार्य योजना बनाई गई है। भोपालपटनम से तरलागुड़ा तक और सुकमा से कोंटा तक पक्की और चौड़ी सड़कों का विस्तार किया जा रहा है। सरायपाली (जिला-महासमुंद) से जिला मुख्यालय रायगढ़ तक 81 किलोमीटर सड़क उन्नयन के लिए भी काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए 496 करोड़ रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति भी दी गई है। इसे मार्च 2018 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। नए राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 पर कटघोरा से शिवनगर 80 किलोमीटर सड़क उन्नयन के लिए 485 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इसमें से अब तक 30 किलोमीटर कांक्रीट सड़क और 32 किलोमीटर डीएलसी सड़क तैयार हो चुकी है। यह सड़क शिवनगर से आगे सरगुजा संभाग के मुख्यालय अम्बिकापुर को भी जोड़ेगी। लगभग 52 किलोमीटर के इस हिस्से के उन्नयन के लिए 335 करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं। जशपुर जिले के पत्थलगांव से सरगुजा जिले के अम्बिकापुर तक 96 किलोमीटर सड़क उन्नयन के लिए 625 करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं। उधर पत्थलगांव से कुनकुरी तक 60 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण के लिए 453 करोड़ रूपए की धन राशि मंजूर की गई है। राज्य के अनेक प्रमुख शहरों और कस्बों को भारी वाहनों के यातायात के दबाव से मुक्त करने के लिए बायपास सड़कों का भी निर्माण किया जा रहा है। आरंग, दुर्ग, राजनांदगांव, सरायपाली आदि इसके उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को 1526 किलोमीटर की 28 सड़कों का निर्माण मार्च 2018 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, जिन पर 12 हजार 266 करोड़ रूपए की लागत आ रही है। इनमें से अब तक 633 किलोमीटर कार्य पूर्ण हो चुका है। कुल 28 सड़कों में से छह सड़कें राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण की हैं, जिनकी लम्बाई 357 किलोमीटर और लागत 5445 करोड़ रूपए है। इनमें से 172 किलोमीटर का काम पूरा कर लिया गया है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों की चार सड़कों का निर्माण में मार्च 2018 तक पूर्ण करने लक्ष्य है। इनकी लम्बाई 187 किलोमीटर और लागत 708 करोड़ रूपए है। राजधानी और न्यायधानी के बीच त्वरित गति से यातायात के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के अंतर्गत रायपुर-बिलासपुर लगभग 110 किलोमीटर फोरलेन सड़क का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। इसे तीन अलग-अलग पैकेजों में स्वीकृत किया गया है।

मुम्बई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-53 (पुराना एनएच-6) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से आरंग होते हुए सरायपाली और आगे संबलपुर की ओर जाता है। इस मार्ग पर रायपुर से सरायपाली जाने में पहले करीब चार घंटे का समय लगना मामूली बात थी, लेकिन 150 किलोमीटर की इस सड़क को वर्ष 2011 में इसे फोरलेन बनाने का काम स्वीकृत किया गया और एक हजार 174 करोड़ रूपए की लागत से लगभग 147 किलोमीटर का कार्य पूर्ण भी कर लिया गया है। अब इस रास्ते से रायपुर-सरायपाली के बीच की दूरी चार घंटे से घटकर सिर्फ दो घंटे रह गई है। इस मार्ग पर रायपुर से लगभग 40 किलोमीटर आगे महानदी पर 50 वर्ष पुराने सिंगल लेन वाले पुल के स्थान पर एक विशाल पुल का निर्माण किया जा चुका है। महानदी पर ही रायगढ़ जिले में सूरजगढ़ के पास लगभग 1800 मीटर लंबे पुल का निर्माण किया गया है, जो छत्तीसगढ़ का सबसे लम्बा सेतु है। इसके बन जाने पर छत्तीसगढ़ के सरिया, बरमकेला और उधर ओड़िशा राज्य के रूचिदा सहित कई गांवों के बीच बारह मासी आवागमन आसान हो गया है।

रायपुर-दुर्ग के बीच 40 किलोमीटर के रास्ते में लगभग 27 किलोमीटर के चौड़ीकरण का कार्य भी 37 करोड़ 47 लाख रूपए की लागत से चल रहा है। यह कार्य दिसम्बर 2017 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। रायपुर-धमतरी फोरलेन सड़क निर्माण के लिए भी काम शुरू हो गया है। इसके लिए लगभग दो हजार करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं। यह सड़क आगे बस्तर संभाग के कांकेर होते हुए जगदलपुर तक जाएगी। इस प्रकार रायपुर से धमतरी होकर जगदलपुर तक करीब 300 किलोमीटर के रास्ते को यातायात की दृष्टि से सुगम और सुरक्षित बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मंशा है कि छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी राज्यों के बीच सड़क सम्पर्क और भी बेहतर हो। इसी कड़ी में उन्होंने राजधानी रायपुर को आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम बंदरगाह तक जोड़ने के लिए एक नए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के प्रस्ताव पर भी अपनी सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। इसके बन जाने पर रायपुर से विशाखापटनम की वर्तमान दूरी 600 किलोमीटर से घटकर 400 किलोमीटर रह जाएगी। इस नए प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग को छत्तीसगढ़ के कुरूद से नगरी (सिहावा) और ओड़िशा के नवरंगपुर से विशाखापट्नम तक चिन्हांकित किया है। प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग तीन राज्यों-छत्तीसगढ़, ओड़िशा और आंध्रप्रदेश को जोड़ेगा। कई आदिवासी बहुल इलाके इसके रास्ते में आएंगे। इन इलाकों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी तेजी आएगी।

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस आशय का प्रस्ताव केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी को फरवरी 2017 में भेजा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से भी प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया था। डॉ. रमन सिंह ने उनके आग्रह को सहर्ष स्वीकार कर लिया। यह नया मार्ग विशाखापट्नम, चिन्थलवलासा, विजयनगर, सलूर तथा ओड़िशा के कोरापुट, उमरकोट, बहेड़ा, दिघली होते हुए छत्तीसगढ़ के कुरूद के रास्ते रायपुर तक बनेगा। इसकी कुल लम्बाई 401 किलोमीटर होगी। छत्तीसगढ़ में यह मार्ग रायपुर से कुरूद, दिघली, नगरी, बोराई से लिखमा तक राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित मार्ग छत्तीसगढ़ में 132 किलोमीटर दो-लेन का होगा और 32 किलोमीटर सिंगल लेन सड़क बनेगी। वर्तमान में रायपुर से कुरूद तक 54 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग है। अब लगभग 110 किलोमीटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिलाने की सहमति छत्तीसगढ़ की ओर से दी जा चुकी है।

इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आम जनता की सुविधा की दृष्टि से एक नया और बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने राज्य बजट से लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित एक हजार से ज्यादा पुलों को टोल टैक्स से मुक्त करने की घोषणा की है। अगले वित्तीय वर्ष 2018 से उनका यह फैसला लागू हो जाएगा। इनमें से 965 पुल वर्ष 2004 से 2017 के बीच बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री को लोक निर्माण विभाग की एक समीक्षा बैठक में ऐसे पुलों को जिनकी सालाना टोल टैक्स वसूली पांच लाख रूपए के आस-पास है और उसमें भी काफी व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं, तो उन्होंने इन पुलों को टोल फ्री करने की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि डॉ. रमन सिंह ने वर्ष 2007-08 में 32 ऐसे पुलों को टोल वसूली से मुक्त कर दिया था, जिनमें सालाना पथकर वसूली पांच लाख रूपए से कम थी। लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत सभी निर्माणाधीन सड़कों और पुल-पुलियों की प्रगति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। वे स्वयं मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य सड़क विकास निगम भी प्रदेश में सड़कों को जाल बिछाने का काम तेजी से कर रहा है। निगम द्वारा 889 किलोमीटर की 27 सड़कों के कार्य हाथ में लिए गए हैं। इनके लिए 3238 करोड़ रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें से 648 किलोमीटर की 22 सड़कों के निर्माण के लिए एजेंसी भी तय कर दी गई है। कई सड़कों का निर्माण प्रगति पर है। राज्य में एशियन विकास बैंक (एडीबी) की की ऋण सहायता से 2200 करोड़ रूपए की 18 सड़कों का निर्माण चल रहा है। एडीबी की ऋण सहायता के तीसरे चरण के लिए छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम द्वारा 5500 करोड़ रूपए के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इस राशि से 32 सड़कों का निर्माण किया जाएगा। प्रदेश के कई शहरों में सुगम और सुरक्षित आवागमन के लिए फ्लाई ओव्हर और रेलवे ओव्हर ब्रिजों का भी निर्माण किया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष 2016-17 में लगभग 105 करोड़ रूपए की लागत से आठ ऐसे कार्यो को पूर्ण किया गया, जिनमें न्यायधानी बिलासपुर के चकरभाठा-बोदरी रेल लाईन में चकरभाटा के पास निर्मित रेलवे ओव्हर ब्रिज, सुकमा जिले में दोरनापाल-कालीमेला मार्ग पर शबरी नदी में, कांकेर जिले में पखांजूर-प्रतापपुर-कोयलीबेड़ा मार्ग पर कोटरी नदी में, राजनांदगांव जिले में मोहला-मानपुर-पांगरी-चौकी मार्ग पर शिवनाथ नदी में, इसी जिले के भर्रेगांव-रवेली-राजनांदगांव मार्ग पर शिवनाथ नदी में, गरियाबंद जिले के नाहरगांव-नागाबुड़ा-बारूला मार्ग पर पैरी नदी में, इसी जिले के देवभोग-कुम्हड़ई-झाखर पारा मार्ग पर तेल नदी में और धमतरी जिले के सरईभदर-जड़जड़ा-गरियाबंद मार्ग पर सोंढूर नदी में निर्मित पुल शामिल हैं। इसके अलावा जून 2018 तक लगभग 286 करोड़ रूपए की लागत से आठ बड़े पुलों का निर्माण भी पूर्ण करने का लक्ष्य है। इनमें राजधारी रायपुर के अंतर्गत काशीराम नगर के पास रिंग रोड नम्बर 1 के ऊपर फ्लाई ओव्हर, शंकर नगर में रायपुर-टिटलागढ़ रेल मार्ग पर ओव्हर ब्रिज तथा आमानाका स्थित रेल्वे ओव्हर ब्रिज के चौड़ीकरण सहित दुर्ग-दल्लीराजहरा रेल मार्ग पर मरौदा रेल्वे क्रॉसिंग में ओव्हर ब्रिज निर्माण, बिलासपुर जिले में हावड़ा-मुम्बई रेल मार्ग पर लाल खदान के पास रेल्वे ओव्हर ब्रिज निर्माण, जांजगीर-चांपा जिले में खोखसा रेल्वे ओव्हर ब्रिज निर्माण, बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग पर गौरेला रेल्वे ओव्हर ब्रिज निर्माण और सुकमा जिले में कोंटा नगर पंचायत से ओड़िशा पहुंच मार्ग पर शबरी नदी में मोटूघाट पर बनने वाला पुल शामिल हैं।

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

तरक्की के नये रास्ते पर छत्तीसगढ़ के किसान

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail
 सौजन्यः जन संपर्क विभाग, छत्तीसगढ़(आलेख – स्वराज कुमार)

CG News के तहत के अन्तर्गत पेश है स्वराज्य कुमार जी का विशेष आलेखः

सिर्फ सोलह साल के किशोर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य के किसान अपनी मेहनत से आज तरक्की के नये रास्ते बनाकर समृद्धि और खुशहाली की नई मंजिलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। राज्य में धान का उत्पादन सिर्फ दस साल के भीतर दोगुने से भी ज्यादा हो गया, वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर राज्य में किसानों की आमदनी वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के लिए भी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने योजनाबद्ध रणनीति के साथ एक व्यापक रोड मैप बनाकर काम शुरू कर दिया है। खेती को अधिक से अधिक लाभदायक बनाने के लिए इसमें कृषि उत्पादन, रेशम उत्पादन, उद्यानिकी फसलों की खेती, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मछलीपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई उपाय और कई लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। रोड मैप में बाजार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, कृषि वानिकी के तहत बांस और अन्य लघु वनोपजों के उत्पादन और विपणन तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए भी इसमें कई महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा की गई है। खेती-किसानी की दशा और दिशा में लगातार एक सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इससे छत्तीसगढ़ के किसान समृद्धि और खुशहाली के नये रास्ते पर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
रमन सरकार ने विगत तेरह साल में प्रदेश के किसानों की बेहतरी के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। ब्याज मुक्त ऋण सुविधा, कृषक जीवन ज्योति योजना के तहत तीन हॉर्स पावर से पांच हार्स पावर तक सिंचाई पम्पों के लिए सलाना 6000 यूनिट से 7500 यूनिट तक मुफ्त बिजली, सौर सुजला योजना के तहत अत्यंत किफायती मूल्य पर सोलर सिंचाई पंप, विद्युत कनेक्शन वाले सिंचाई पंपों की संख्या 94 हजार से बढ़ाकर तीन लाख 70 हजार तक पहुंचाना, सिंचाई योजनाओं का विकास और विस्तार, समर्थन मूल्य नीति के तहत सहकारी समितियों में वर्ष 2003-04 से 2015-16 तक छह करोड़ 22 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी और किसानों को लगभग 65 हजार करोड़ रूपए का भुगतान, इनमें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के अनुसार किसानों की समृद्धि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। वर्ष 2007 की तुलना में 2016-17 में राज्य में एक करोड़ 20 लाख टन फसलों की पैदावार मिली है, जो वर्ष 2007 की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।
ब्याज मुक्त ऋण सुविधा से किसानों में नये उत्साह का संचार

किसानों की बेहतरी के लिए राज्य शासन द्वारा तैयार रोड मैप के अनुसार एकीकृत कार्ययोजना में किसानों के लिए ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋणों की वर्तमान राशि 3800 करोड़ रूपए से बढ़ाकर पांच वर्ष में 5772 करोड़ रूपए तक ले जाने का लक्ष्य है। हमें इस बात को भी याद करना चाहिए कि राज्य निर्माण के प्रारंभिक तीन वर्षो में किसानों को सहकारी बैंकों के जरिए से सहकारी समितियों में 13 से 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर ऋण मिलता था। डॉ. रमन सिंह की सरकार ने इन ब्याज दरों को वर्ष 2004-05 में 9 प्रतिशत, वर्ष 2006-07 में 7 प्रतिशत, वर्ष 2007-08 में 6 प्रतिशत, वर्ष 2008-09 में 9 प्रतिशत और 2012-13 में 1 प्रतिशत कर दिया। रमन सरकार ने किसानों के लिए ब्याज दर को वर्ष 2013-14 से शून्य प्रतिशत कर दिया। कृषि ऋणों की ब्याज दरों में भारी कमी होने और बाद में ब्याज मुक्त ऋण सुविधा मिलने पर किसानों में नए उत्साह का संचार हुआ है और सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ने लगी है। वर्ष 2001-02 में जब यह ब्याज दर 13 से 15 प्रतिशत थी, उस समय सिर्फ तीन लाख 96 हजार किसानों ने इस सुविधा का लाभ लिया था, जबकि वर्ष 2012-13 में ब्याज दर एक प्रतिशत होने पर ऋण लेने वाले किसानों की संख्या बढ़कर 9 लाख 45 हजार से ज्यादा हो गई और आज की स्थिति दस लाख से अधिक किसानों को ब्याज मुक्त ऋण सुविधा का लाभ मिल रहा है।
रमन सरकार ने इस वर्ष एक हजार 333 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के जरिए खरीफ मौसम में 3200 करोड़ रूपए और रबी मौसम में 600 करोड़ रूपए का ब्याज मुक्त ऋण वितरण का लक्ष्य है। इस बार खरीफ में अब तक इस लक्ष्य के विरूद्ध 1500 करोड़ रूपए से ज्यादा ऋण वितरित किया जा चुका है। यह राशि उन्हें 60 प्रतिशत वस्तु (खाद और बीज) तथा 40 प्रतिशत नगद के रूप में दी जा रही है। पिछले साल 2016 में खरीफ मौसम के दौरान किसानों को 2800 करोड़ रूपए के लक्ष्य के विरूद्ध 2855 करोड़ 26 लाख रूपए का ऋण दिया गया था। वर्तमान में ब्याज मुक्त ऋण सुविधा का लाभ ले रहे लगभग दस लाख से ज्यादा किसानों के अलावा समितियों में अगले पांच साल में कम से कम पांच लाख नए किसानों को भी सदस्य के रूप में जोड़ने का लक्ष्य है, जिन्हें नए किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाएंगे। यह रोड मैप कृषि और जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा तैयार किया गया है। कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने अधिकारियों को इस रोड मैप के सभी प्रावधानों पर अमल के लिए तत्परता से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। श्री अग्रवाल ने समय-समय पर स्वयं इसकी विस्तृत समीक्षा भी कर रहे हैं।

किसानों के लिए अलग से कृषि बजट

छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने वर्ष 2012-13 से राज्य के मुख्य बजट के साथ किसानों के लिए अलग से कृषि बजट की शुरूआत की है। उसमें कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों में किसानों की सुविधा के लिए छह हजार 244 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया था, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 10 हजार 676 करोड़ रूपए तक पहुंच गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2017-18 में भी राज्य सरकार ने कृषि बजट में दस हजार करोड़ रूपए से ज्यादा राशि का प्रावधान किया है। इसमें सिंचाई सुविधाओं के लिए 5242 करोड़ रूपए, कृषि विकास योजनाओं के लिए 2279 करोड़ रूपए, पशुपालन के लिए 517 करोड़ रूपए, सहकारिता के लिए 298 करोड़ रूपए और मछलीपालन के लिए 100 करोड़ रूपए की धन राशि निर्धारित की गई है। इस वर्ष के कृषि बजट के अनुसार 32 लाख से ज्यादा किसानों के लिए प्रति किसान लगभग 28 हजार रूपए का औसत बजट प्रावधान है।
प्रदेश को अब तक चार कृषि कर्मण पुरस्कार
राज्य को वर्ष 2011 से 2016 की अवधि में भारत सरकार की ओर से चार बार कृषि कर्मण पुरस्कारों से नवाजा गया है। इनमें से तीन कृषि कर्मण पुरस्कार सर्वाधिक चावल उत्पादन के लिए और एक पुरस्कार दलहन के क्षेत्र में दिया गया है। राज्य में विगत 12 साल में चावल उत्पादन में 39 प्रतिशत, गेहूं के उत्पादन में 24 प्रतिशत और दलहन-तिलहन के उत्पादन में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

खेती-किसानी की शिक्षा पर भी विशेष जोर

प्रदेश की नयी पीढ़ी को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए कृषि शिक्षा पर भी विशेष रूप से जोर दिया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर केे अंतर्गत वर्ष 2003-04 में जहां सिर्फ चार सरकारी कृषि महाविद्यालय थे, वहीं इनकी संख्या वर्ष 2016-17 तक बढ़कर 12 हो गयी। इस अवधि में शासकीय उद्यानिकी कॉलेजों की संख्या शून्य से बढ़कर दो और शासकीय कृषि इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या भी शून्य से बढ़कर दो हो गयी। पशुधन खेती का मुख्य आधार हैं। इसे ध्यान में रखकर प्रदेश के युवाओं को पशुपालन और पशु चिकित्सा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा की सुविधा दिलाने के लिए रमन सरकार द्वारा वर्ष 2012 में दुर्ग जिले के ग्राम अंजोरा में कामधेनु विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है, जिसका संचालन सफलतापूर्वक हो रहा है। खेती के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 20 कृषि विज्ञान केन्द्र भी संचालित हो रहे हैं।

राज्य तीन जलवायु क्षेत्रों में सीमांकित

किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए राज्य सरकार के रोड मैप में सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश को तीन अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों में सीमांकित करते हुए स्थानीय जलवायु विविधता के अनुरूप फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की मंशा प्रकट की गई है। उत्तरी छत्तीसगढ़ पहाड़ी इलाकों में फैला हुआ है।  कृषि विशेषज्ञों के अनुसार वहां की भौगोलिक परिस्थितियां और शीतल जलवायु गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए काफी अनुकूल है। इसी तरह राजनांदगांव से मुंगेली तक काली मिट्टी वाले क्षेत्रों को रबी मौसम में चना और खरीफ मौसम में सोयाबीन उत्पादन क्षेत्र के रूप में चिन्हांकित किया गया। बस्तर और सरगुजा के सूदूरवर्ती इलाके परपंरागत रूप से जैविक खेती के लिए पहचाने जाते हैं। दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती के लिए शुरू की गई ‘मोचोबाड़ी’ परियोजना को अच्छी सफलता मिल रही है। राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सर्वोत्तम व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रशंसा मिली है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने के रोड मैप में इन बातों को ध्यान में रखकर रणनीति तय की गई है। इसमें यह भी ध्यान रखा गया है कि राज्य में धान को छोड़कर अन्य फसलों के लिए पर्याप्त प्रसंस्करण उद्योगों की कमी है। दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए समर्थन मूल्य पर उपार्जन की व्यवस्था को भी व्यापक बनाने की जरूरत है। प्रदेश के दो तिहाई से ज्यादा इलाकों में वर्षा आधारित खेती को भी रोड मैप में एक चुनौती के रूप में लेकर सिंचाई संसाधनों में वृद्धि पर भी जोर दिया गया है। रोड मैप में कहा गया है कि राज्य के प्रत्येक गांव के नजदीक से छोटे अथवा मंझोले बरसाती नाले गुजरे हैं, जो खेती के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।

साढे़ तीन लाख से ज्यादा वन अधिकार
मान्यता पत्र धारकों को भी मिलेगा फायदा

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में वन अधिकार मान्यता पत्र धारक तीन लाख 57 हजार से ज्यादा वनवासी परिवारों को तीन लाख 14 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्रों में खेती के लिए व्यक्तिगत पट्टे दिए गए हैं, वहीं आठ हजार 866 सामुदायिक पट्टे एक लाख 52 हजार हेक्टेयर रकबे में दिए गए हैं। वन अधिकार मान्यता पत्र धारक इन वनवासियों को खेती के लिए खाद और बीज, भूमि समतलीकरण तथा कृषि उपकरणों के लिए सहायता दी गई है। रोड मैप में उनकी आमदनी को भी दोगुनी करने के लिए विशेष प्रयासों पर बल दिया गया है और कहा गया है कि उन्हें उन्नत खेती से जोड़कर उद्यानिकी, कृषि वानिकी, पशुपालन और मुर्गीपालन योजनाओं का भी लाभ दिलाया जाएगा।

लगभग 37.46 लाख किसानों के खेतों में हो रहा मिट्टी परीक्षण

राज्य के लगभग 37 लाख 46 हजार किसानों के खेतों में ग्रिड आधार पर मिट्टी परीक्षण भी किया जा रहा है। इस वर्ष 2017 तक सभी किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य पत्रक (स्वायल हेल्थकार्ड) देने का अभियान भी चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी परीक्षण कार्डो में की गई अनुशंसाओं के अनुसार खाद के उपयोग में दस प्रतिशत की बचत होगी और पैदावार में पांच प्रतिशत की वृद्धि होगी।

कतार बोनी को बढ़ावा

रोड मैप में बताया गया है कि राज्य में वर्तमान में सिर्फ दो लाख 60 हजार हेक्टेयर में कतार बोनी से धान की बोआई की जाती है। अगले पांच साल में इसे पांच लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाने का लक्ष्य है। इससे 60 हजार क्विंटल बीजों की बचत होगी। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश के सभी बीस हजार गांवों में एक-एक चिमनी खाद गढ्ढों का निर्माण किया जाएगा। इससे लगभग दो लाख मीटरिक टन कम्पोस्ट खाद मिलेगी। जैविक खाद तैयार करने के लिए प्रदेश भर में ग्राम पंचायतों के स्तर पर पांच लाख वर्मी कम्पोस्ट टांके/नाडेप टांके बनवाए जाएंगे, जिनमें कम से कम 15 लाख मीटरिक टन जैविक खाद का उत्पादन हो सकेगा। प्रदेश में इस समय खेतों की मेड़ों पर अरहर, तिल, अरण्डी और रामतिल जैसी फसलों का वर्तमान रकबा सिर्फ दो लाख 02 हजार हेक्टेयर है, जिसे अगले पांच साल में पांच लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

करीब 3.60 लाख हेक्टेयर में होगी स्प्रिंकलर-ड्रिप सिंचाई

रोड मैप के अनुसार अगले पांच साल में किसानों को लघु सिंचाई सुविधा देने के लिए तीन लाख 60 हजार हेक्टेयर में स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। किसानों को सरकारी अनुदान पर स्प्रिंकलर सेट दिए जाएंगे।

साढ़े चार लाख सिंचाई नलकूपों की होगी रिचार्जिंग

इसके अलावा राज्य में स्थापित चार लाख 50 हजार सिंचाई नलकूपों की रिर्चाजिंग पर भी इसमें जोर दिया गया है। इस उद्देश्य से बारिश के पानी को एकत्रित करने के लिए मनरेगा के तहत स्थानीय बरसाती नालों और छोटी नदियों में अगले पांच साल में दस हजार भूमिगत बंधारा बनवाए जाएंगे। इससे भूजल स्तर बढ़ेगा।

छोटे-बड़े नालों में हर एक किलोमीटर पर बनेगा चेकडेम

रोड मैप के अनुसार राज्य के छोटे-बड़े नालों में श्रृंखलाबद्ध तरीके से चेकडेम भी बनवाए जाएंगे। हर साल ऐसे नालों के किनारे 700 किलोमीटर की लंबाई में 700 से 725 चेकडेमों के निर्माण का लक्ष्य है। अर्थात हर एक किलोमीटर एक चेकडेम बनेगा। इनका निर्माण प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राज्य पोषित योजना के जरिए किया जाएगा। जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में 495 एनीकट और स्टॉप डेम बनवाए गए हैं। अगले पांच साल में इनके किनारों पर बिजली लाईन विस्तार करते हुए 44 हजार हेक्टेयर में उदवहन सिंचाई को बढ़ावा दिया जाएगा। शाकम्भरी योजना के तहत एक लाख दस हजार किसानों को सिंचाई पंप 75 प्रतिशत अनुदान पर देने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बाजार व्यवस्था को मजबूत बनाने कई बड़े निर्णय

किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार के रोड मैप में कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दृष्टि से भी कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश की चिन्हांकित 14 कृषि उपज मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने, फल और सब्जी उपमंडियों की स्थापना, किसान उपभोक्ता बाजारों की स्थापना जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं। वनौषधियों और हर्बल प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। लाख कृमि पालन और लाख उत्पादन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2022 तक प्रदेश के 54 हजार से ज्यादा किसानों को लाख की खेती से जोड़ने का लक्ष्य है। इसकी खेती 12 लाख से अधिक कुसुम, पलाश और बेर के वृक्षों में की जाएगी। राज्य के वनो में 19 प्रतिशत बांस के जंगल हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 50 हजार नोशनल टन बांस का उत्पादन होता है, जबकि मांग 60 हजार नोशनल टन की है। रोड मैप में इसकी पूर्ति के लिए वनो के साथ-साथ किसानों की नीजि भूमि पर भी बांस रोपण को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य घोषित किया गया है। तेंदूपत्ता, साल बीज, हर्रा, महुआ, बहेड़ा, जैसी लघु वनोपजों के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए भी रोड मैप में रणनीति तय की गई है।

लगभग 12 लाख हेक्टेयर तक पहुंचेगा उद्यानिकी फसलों का रकबा

राज्य में उद्यानिकी फसलों का वर्तमान रकबा सात लाख 41 हजार हेक्टेयर है। इसे वर्ष 2021-22 तक बढ़ाकर 11 लाख 93 हजार हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। रणनीति में फलों की खेती को दो लाख 25 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 6 लाख 62 हजार हेक्टेयर, सब्जियों की खेती को चार लाख 14 हेक्टेयर से बढ़ाकर चार लाख 14 हजार हेक्टेयर, मसालों की खेती को 51 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर एक लाख 46 हजार हेक्टेयर और फूलों की खेती को 11 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 18 हजार हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। रोड मैप में उद्यानिकी किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और नर्सरियों के आधुनिकीकरण का भी लाभ दिलाने की रणनीति घोषित की गई है।

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

छत्तीसगढ़ सरकार के तेरह साल (Thirteen Years of CG Government)

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

cg gk in Hindi

CG News के तहत पेश है छत्तीसगढ़ सरकार के तेरह साल की उपलब्धियाँ।

छत्तीसगढ़ सरकार (CG Government) ने अपने तेरह सालों में खेती-किसानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। किसानों को सुविधाएँ उपलब्ध कराना छत्तीसगढ़ सरकार (CG Government) का प्रमुख लक्ष्य रहा है।

प्रमुख उपलब्धियाँ –

ब्याज मुक्त ऋण सुविधा के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के किसानों को कृषि कार्य हेतु सहकारी समितियों में ब्याज मुक्त ऋण सुविधा।

कृषक जीवन ज्योति योजना के अंतर्गत् तीन हार्स पावर तक के सिंचाई पम्पों के लिए प्रतिवर्ष 6000 यूनिट बिजली निःशुल्क तथा तीन से पाँच हार्स पावर तक सिंचाई पम्पों के लिए प्रतिवर्ष 7500 यूनिट बिजली निःशुल्क।

समर्थन मूल्य नीति के तहत धान खरीदी की कम्प्यूटरीकृत पारदर्शी व्यवस्था।

सिंचाई पम्पों के विद्युतीकरण के लिए लाईन विस्तार पर प्रति पम्प किसानों को 75 हजार रूपए का अनुदान। इससे अधिक राशि की जरूरत होने पर ऐसे पम्पों को असाध्य मानकर सरगुजा एवं बस्तर आदिवासी विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण और ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण से अतिरिक्त राशि देने का प्रावधान।

छत्तीसगढ़ में सन् 2003 में विद्युतीकृत सिंचाई पम्पों की संख्या लगभग 94 हजार थी, जो सन् 2015-16 में बढ़कर लगभग तीन लाख 70 हजार तक हो गई है।

खरीफ मौसम 2016 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में छत्तीसगढ़ के 13 लाख 66 हजार 302 किसान सम्मिलित हैं। इस बीमा में 12,09,357 ऋणी तथा 1,56,945 अऋणी किसान शामिल हैं।

रायपुर जिले के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र का शुभारंभ 12 सितम्बर 2016 को इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में हुआ। इसे मिलाकर छत्तीसगढ़ में कुल 20 कृषि विज्ञान केन्द्र हैं।

12 सितम्बर 2016 को ही कृषि विश्वविद्यालय परिसर में भारत के सबसे बड़े कृषि संग्रहालय की भी स्थापना।

छत्तीसगढ़ के 32 लाख से भी अधिक किसानों को उनके खेतों की मिट्टी के स्वास्थ्य की जाँच तथा स्वायल हेल्थ कार्ड देने का कार्य प्रगति पर है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर छत्तीसगढ़ सरकार ने अगले छह वर्षों में (वर्ष 2022 तक) किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए रोडमेप बनाया है।

उपरोक्त रोडमैप में किसानी के साथ-साथ बाजार व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, कृषि वानिकी और लघु वनोपजों के उत्पादन, रेशम की खेती, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, दूध उत्पादन और मछलीपालन को बढ़ावा देने के लिए सम्बद्ध विभागों की अलग-अलग कार्य योजनाएँ शामिल हैं।

कृषि उत्पादन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार ने चार राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार प्रदान किया है। इनमें से तीन पुरस्कार धान (चावल) के लिए और एक पुरस्कार दलहन उत्पादन के क्षेत्र में प्राप्त हुआ।

सहकारिता

छत्तीसगढ़ की 1333 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के तहत 1989 उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी सर्वोत्तम व्यवस्था है।

उपरोक्त सहकारी समितियों के 21 लाख 63 हजार सदस्य किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किया गया है।

उन्हें खेती के लिए क्रेडिट कार्ड के माध्यम से शून्य ब्याज दर पर ऋण सुविधा प्रदान की गई है।

धान उपार्जन के सभी केन्द्रों का कम्प्यूटरीकरण कर दिया गया है।

पिछले खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में इन सहकारी समितियों में किसानों से 59 लाख 29 हजार मीटरिक टन धान खरीदा गया तथा उन्हें इसके लिए आठ हजार 430 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया।

कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के नीति के तहत सहकारिता के क्षेत्र में राज्य में तीन शक्कर कारखाने क्रमशः भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ग्राम राम्हेपुर (जिला कबीरधाम), दंतेश्वरी मईया सहकारी शक्कर कारखाना ग्राम करकाभाठ (जिला बालोद) और माँ महामाया सहकारी शक्कर कारखाना ग्राम केरता (जिला सूरजपुर) में संचालित।

सहकारिता के क्षेत्र में प्रदेश के चौथे शक्कर कारखाने का निर्माण कबीरधाम जिले के पंडरिया क्षेत्र में 165 करोड़ रूपए की लागत से तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर है।

इस नये शक्कर कारखाने का नामकरण लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर किया गया है।

वर्तमान में संचालित तीनों सहकारी शक्कर कारखानों में पेराई सीजन वर्ष 2015-16 में कुल छह लाख 08 हजार 381 मीटरिक टन गन्ने की पेराई की गई और पाँच लाख 73 हजार 511 मीटरिक टन शक्कर का उत्पादन किया गया।

सहकारी समितियों में खाद भण्डारण की क्षमता बढ़ाने के लिए विगत 13 वर्ष में 700 गोदाम (भण्डार गृह) स्वीकृत किए गए। इनमें से 695 का निर्माण पूरा कर लिया गया।

राज्य में गौपालन और मछली पालन के लिए सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण सुविधा।

पिछले साल किसानों को मछली पालन के लिए 22 लाख 61 हजार रूपए और गौपालन के लिए चार करोड़ रूपए का ऋण प्रदान किया गया था।

जल संसाधन

वर्ष 2003-04 में सिंचाई का बजट लगभग 508 करोड़ रूपए था, जो इस वित्तीय वर्ष 2016-17 में बढ़कर 2532 करोड़ रूपए तक पहुँच गया है।

इस दौरान प्रदेश की कुल निर्मित सिंचाई क्षमता 14.53 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 19.51 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गई है।

विगत बारह वर्ष में तीन वृहद सिंचाई परियोजनाओं-जोंक व्यपवर्तन, महानदी परियोजना समूह और हसदेव बांगो परियोजना तथा छह मध्यम सिंचाई परियोजनाएं-मांड व्यपवर्तन, सूतियापाठ जलाशय, अपर जोंक नहर परियोजना, खरखरा-मोहदीपाट नहर परियोजना, कोसारटेडा जलाशय और कर्रानाला बैराज तथा 455 लघु सिंचाई योजनाओं का निर्माण पूर्ण किया गया।

अरपा नदी पर 606 करोड़ रूपए की लागत से अरपा भैंसाझार परियोजना का निर्माण प्रगति पर है।

बिलासपुर जिले के कोटा, बिल्हा और तखतपुर विकासखण्डों के 102 गाँवों के किसानों को फायदा मिलेगा।

लगभग 25 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होगी।

शिवनाथ नदी पर 228 करोड़ की लागत वाली मोहड़ जलाशय का निर्माण प्रगति पर है।

बालोद और राजनांदगांव जिलों के किसानों को फायदा मिलेगा।

रायगढ़ जिले में 598 करोड़ की लागत से केलो वृहद सिंचाई जलाशय का निर्माण जारी है।

इस जलाशय से रायगढ़ और जांजगीर-चांपा जिलों के 175 गांवों के 23 हजार हेक्टेयर खेतों को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

बिजली

छत्तीसगढ़ देश का पहला विद्युत कटौती मुक्त राज्य है। वर्ष 2008 से लगातार जीरो पावर कट।

एकल बत्ती योजना के तहत प्रदेश के 15.54 लाख बीपीएल परिवारों को हर महीने 40 यूनिट बिजली निःशुल्क। वर्ष 2003 में इनकी संख्या सिर्फ 6.90 लाख थीं।

मुख्यमंत्री एल.ई.डी. लैम्प वितरण योजना-प्रत्येक बीपीएल बिजली उपभोक्ता को तीन एल.ई.डी. लैम्प निःशुल्क।

एपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं को सिर्फ 65 रूपए प्रति बल्ब की दर पर अधिकतम 10 एलईडी बल्ब दिए जा रहे हैं।

एपीएल उपभोक्ताओं को पाँच एलईडी बल्ब मासिक किश्तों में भी देने की सुविधा। योजना 13 मार्च 2016 से प्रारंभ।

अब तक 11 जिलों में 19 लाख से ज्यादा एल.ई.डी. बल्ब वितरित हो चुके हैं।

राज्य के 73 हजार 848 मजरा-टोलों में से 68 हजार 790 मजरा-टोलों में परम्परागत और गैर-परम्परागत पद्धतियों से बिजली पहुँचाई गई।

बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के यथासंभव तुरंत निराकरण के लिए हेल्पलाईन नम्बर 1912 के साथ केन्द्रीकृत विद्युत कॉल सेंटर चौबीसों घण्टे संचालित।

शिक्षा

स्कूल शिक्षा – वर्ष 2003-04 की तुलना में राज्य में प्राथमिक स्कूलों की संख्या 13,852 से बढ़कर लगभग 37 हजार, उच्च प्राथमिक (मिडिल) स्कूलों की संख्या 5642 से बढ़कर 16,692, हाई स्कूलों की संख्या 908 से बढ़कर 2609 और हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या 680 से बढ़कर 3715 तक पहुँच गई है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 60 पोटाकेबिनों के माध्यम से 30 हजार बच्चों को आवासीय शिक्षा सुविधा।

मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना – नक्सल प्रभावित जिलों के बच्चों के लिए सभी पाँच संभागीय मुख्यालयों – रायपुर, बिलासपुर,जगदलपुर, दुर्ग और अम्बिकापुर – में आवासीय विद्यालय संचालित का प्रयास किया जा रहा है।

इनमें ग्यारहवीं-बारहवीं तक पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को पीएमटी, पीईटी, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग की सुविधा। इस वर्ष प्रयास विद्यालयों के 27 बच्चे जेईई में उत्तीर्ण होकर आईआईटी के लिए चयनित।

स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर वर्ष 2015 से शिक्षा गुणवत्ता अभियान संचालित।

प्रदेश में वर्ष 2003-04 में प्राथमिक स्तर पर बच्चों के द्वारा शाला छोड़ने की दर (ड्राप आउट रेट) 10.50 प्रतिशत थी, जो अब घटकर सिर्फ एक प्रतिशत रह गई है।

उच्च शिक्षा -राज्य में वर्ष 2003 में सिर्फ तीन शासकीय विश्वविद्यालय थे। इनकी संख्या वर्ष 2015 तक बढ़कर आठ हो गई। इस अवधि में सरकारी कॉलेजों की संख्या 116 से बढ़कर 214 तक पहुंच गई। सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर राज्य में वर्ष 2003 में 184 कॉलेज थे, जबकि आज इनकी संख्या 472 हो गई।

राज्य के सभी 27 जिलों में युवाओं को पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा की सुविधा। इसके लिए 47 शासकीय कॉलेजों में विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम स्वीकृत।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना-कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर अधिकतम चार लाख रूपए की ऋण सुविधा।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को इस योजना के तहत ब्याज मुक्त ऋण। योजना दो लाख रूपए तक वार्षिक आमदनी वाले परिवारों के विद्यार्थियों के लिए संचालित।

तकनीकी शिक्षा

नया रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) 23 जून 2015 से प्रारंभ। भिलाई नगर के लिए 07 अगस्त 2016 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भवन निर्माण होने तक रायपुर के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रारंभ।

चिकित्सा शिक्षा

विगत दस वर्ष में चार नये मेडिकल कॉलेज। वर्ष 2006 में बस्तर (जगदलपुर), वर्ष 2013 में रायगढ़, वर्ष 2014 में राजनांदगांव और इस वर्ष तीन सितम्बर 2016 को सरगुजा (अम्बिकापुर) में शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ। इन्हें मिलाकर छत्तीसगढ़ में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या छह तक पहुंची। राज्य की चारों दिशाओं में मेडिकल कॉलेज खोलने का मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का सपना हुआ साकार।

बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएँ

गर्भवती माताओं को घर से अस्पताल और अस्पताल से घर तक पहुँचाने के लिए टोल फ्री नम्बर 102 पर आधारित महतारी एक्सप्रेस की सुविधा।

एक वर्ष तक के बच्चों की चिकित्सा के लिए निःशुल्क सुविधा।

योजना 23 अगस्त 2013 से प्रारंभ। अब तक लगभग 16 लाख से ज्यादा माताओं और बच्चों को मिली यह सुविधा।

प्रदेश भर में 300 महतारी एक्सप्रेस वाहन संचालित।

आकस्मिक दुर्घटना और गंभीर बीमारी के दौरान पीड़ितों को तत्काल मदद पहुँचाने टोल फ्री नम्बर 108 पर आधारित संजीवनी एक्सप्रेस सेवा वर्ष 2011 से प्रारंभ। इसके अंतर्गत राज्य में 240 संजीवनी वाहनों का संचालन। इन वाहनों के जरिए अब तक 12 लाख 75 हजार लोगों को मिली आपातकालीन चिकित्सा सहायता। निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श के लिए टोल फ्री नम्बर 104 पर आधारित आरोग्य परामर्श सेवा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में 40 लाख से ज्यादा परिवार शामिल। प्रत्येक परिवार को 30 हजार रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को अब 60 रूपए से बढ़ाकर 100 रूपए का भोजन निःशुल्क।

जेनेरिक दवाईयों के लिए राज्य में 108 जन औषधि केन्द्र संचालित।

अगस्त 2014 से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु योजना प्रारंभ। योजना के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों और स्कूलों में अब तक 97 लाख से ज्यादा बच्चों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और इनमें से आवश्यकता अनुसार 16 लाख से ज्यादा बच्चों का निःशुल्क इलाज।

मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना वर्ष 2008 से संचालित। हृदय रोग पीड़ित बच्चों का इलाज सरकारी खर्च पर करने का प्रावधान। योजना के तहत राज्य के मान्यता प्राप्त अस्पतालों में 6147 बच्चों को मिला नया जीवन।

छत्तीसगढ़ में शिशु मृत्यु दर वर्ष 2003 में प्रति एक हजार जीवित जन्म पर 70 थी, जो वर्ष 2014 की स्थिति में घटकर 43 हो गई है।

छत्तीसढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास और विस्तार के लिए अधोसंरचना निर्माण तेजी से जारी है।

विगत तेरह साल में सरकारी जिला अस्पतालों की संख्या सात से बढ़कर 26, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 114 से बढ़कर 169, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 512 से बढ़कर 785 और उप-स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 3818 से बढ़कर 5186 तक पहुंच गई है। राज्य में वर्ष 2001-02 में केवल 07 सरकारी रक्त बैंक थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर 19 हो गई है।

स्वास्थ्य विभाग के बजट में विगत तेरह साल में 16 गुना वृद्धि की गई है। वर्ष 2003-04 में इस विभाग का बजट सिर्फ 242 करोड़ 33 लाख रूपए था, जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 3987 करोड़ 12 लाख रूपए तक पहुंच गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के साथ-साथ मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का सुचारू संचालन। इन दोनों बीमा योजनाओं के तहत प्रदेश के लगभग 55 लाख 80 हजार परिवारों को सरकारी और पंजीकृत अस्पतालों में वार्षिक 30 हजार रूपए तक निःशुल्क इलाज का सुविधा।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली

गरीबों को भोजन का अधिकार

छत्तीसगढ़ भारत का पहला राज्य है जिसने अपनी विधानसभा में कानून बनाकर राज्य के 58 लाख से ज्यादा गरीब परिवारों को भोजन का अधिकार दिलाया है। इसके लिए प्रदेश में छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा एवं पोषण सुरक्षा कानून 2012 लागू किया गया है। इस कानून के तहत गरीब परिवारों को राशन कार्ड पर प्रति सदस्य (यूनिट) सिर्फ एक रूपए में सात किलो चावल देने का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में इन परिवारों को आयोडिनयुक्त दो किलो नमक निःशुल्क दिया जा रहा है। सामान्य क्षेत्रों में उन्हें एक किलो आयोडिन नमक निःशुल्क मिल रहा है। आदिवासी क्षेत्रों में प्रत्येक राशन कार्ड धारक गरीब परिवार को मात्र पांच रूपए किलो में दो किलो चना भी दिया जा रहा है। गरीबों को कुपोषण से बचाने में यह कानून काफी मददगार साबित हो रहा है। विगत तेरह साल में राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकानों की संख्या 8673 से बढ़कर 12 हजार 349 तक पहुंच गई है। प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का कव्हरेज बढ़कर 84 प्रतिशत हो गया है। सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एक बड़ी विशेषता है। राज्य की 12 हजार 349 राशन दुकानों में से 97 प्रतिशत दुकानों का कम्प्यूटरीकरण एंड्रायड टेबलेट के माध्यम से किया जा चुका है। पारदर्शिता और जनभागीदारी की दृष्टि से छत्तीसगढ़ की इस प्रणाली को वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। इस जनभागीदारी वेबसाइट http//cg.nic.in/citizen और khadya.cg.nic.in में इस प्रणाली के तहत राज्य में हो रहे कार्यों को सीधे देखा जा सकता है। सिटीजन वेबसाइट में नागरिक अपनी शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं। निःशुल्क कॉल सेंटर भी बनाया गया है, जिसका नम्बर 1800-233-3663 और 1967 है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली उज्ज्वला योजना में छत्तीसगढ़ सरकार ने दो साल के भीतर 25 लाख गरीब परिवारों को निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन, डबल बर्नर चूल्हा और पहला सिलेण्डर निःशुल्क देने का निर्णय लिया है। योजना राज्य में 13 अगस्त 2016 से शुरू हुई है। अब तक लगभग चार लाख गरीब परिवारों को महिलाओं के नाम पर रसोई गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इससे इन परिवारों की महिलाओं को रसोई घरों में लकड़ी अथवा कोयले के चूल्हों के धुएं से मुक्ति मिली है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में हितग्राही अंशदान सिर्फ 200 रूपए है। शेष तीन हजार रूपए सरकारी अनुदान के रूप में दिए जा रहे हैं। इसमें से 1400 रूपए राज्यांश और 1600 रूपए केन्द्रांश शामिल हैं।

धान खरीदी

धान छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसल है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत धान खरीदी में भी राज्य ने अपनी एक अलग पहचान बनायी है। प्रदेश की 1333 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के 1989 उपार्जन केन्द्रों में निर्धारित समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जा रहा है। वर्ष 2003-04 से वर्ष 2015-16 तक विगत तेरह वर्ष में लगभग छह करोड़ 22 लाख करोड़ मीटरिक टन धान की खरीदी हुई और इसके लिए समितियों के सदस्य किसानों को करीब 64 हजार 730 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया। धान खरीदी के कार्यों में भी पारदर्शिता की दृष्टि से प्रत्येक समिति, प्रत्येक उपार्जन केन्द्र और समितियों के सदस्य किसानों की जानकारी, उनके द्वारा बेचे गए धान, उसके ऑन लाइन भुगतान आदि का ब्यौरा भी खाद्य विभाग की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

प्रधानमंत्री की प्राथमिकता वाली योजनाएँ

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत छत्तीसागढ़ में 47 लाख 12 हजार लोगों को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाया गया। इस योजना में छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत दो लाख 37 हजार से ज्यादा छोटे कारोबारियों को 1367 करोड़ से अधिक ऋण राशि का वितरण कर 105 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य के वर्ष 2015 के सूखा पीड़ित किसानों को 658 करोड़ रूपए का मुआवजा वितरित। छत्तीसगढ़ में 13 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू होने के सिर्फ साढ़े तीन माह के भीतर लगभग चार लाख गरीब परिवारों को महिलाओं के नाम पर निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन दिया जा चुका है।

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail