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Unique Tradition of Khappar March

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कवर्धा में खप्पर निकलने की प्रथा (Unique Tradition of Khappar March)

khappar March

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कवर्धा (Kawardha) में नवरात्रि के अष्टमी की रात को खप्पर निकालने (Khappar March) की विशिष्ट प्रथा (unique tradition) है।

इस विशिष्ट प्रथा (unique tradition) के अन्तर्गत् प्रत्येक नवरात्रि की अष्टमी की अर्द्धरात्रि में 2-4, जिन्हें खप्परधारी कहा जाता है, लोग माँ परमेश्वरी मन्दिर तथा माँ चण्डी मंदिर से एक हाथ में अग्नि से धधकता हुआ खप्पर (Khappar) लेकर और दूसरे हाथ में चमकती नंगी तलवार लहराते हुए निकलते हैं।

खप्परधारी गहरे लाल रंग के वस्त्र पहने होते हैं, सिर पर कृत्रिम लंबे केश और मुकुट होता है। इनका रौद्ररूप अत्यन्त भयावह होता है।

खप्पर धारियों के आगे आगे हाथ में तलवार या झंडा लिए हुए कुछ लोग चलते हैं जिन्हें अगुआन या लंगूर कहा जाता है।

ये सभी विचित्र सी भयानक किलकारी “हूऽऽऊऊऊ… हूऽऽऊऊऊ… हूऽऽऊऊऊ…” की आवाज करते हुए निकलते हैं।

पूरे नगर के तथा आस-पास के गाँवों से आये हुए लोग इस खप्पर जुलूस को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर एकत्रित रहते हैं।

हजारों की संख्या में लोगों के उपस्थित होने के बावजूद भी भय के कारण सन्नाटा छाया रहता है।

खप्पर के पीछे माता की सेवा में लगे, परंपरानुसार मंत्रोच्चारणों के साथ पूजा-अर्चना करते पंडित चलते हैं।

यह खप्पर (Khappar) जिला/पुलिस प्रशासन तथा नगर में नगरवासियों को मन्दिर समिति के द्वारा आम सूचना दिए जाने के बाद परम्परागत निर्धारित मार्ग से शहर के सभी देवी मंदिरो से होता हुआ पुनः मंदिर प्रांगण पहुंचता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह प्रथा ग्राम व नगर की पूजा प्राकृतिक आपदाओं से मुक्ति दिलाने व नगर में विराजमान देवी-देवताओं का रीति-रिवाजों के अनुरुप मान-मनौव्वल स्थापित करने के लिए है।

मूल लेखः ” खप्पर ” कवर्धा देवी के मंदिर से दाएं हाथ में चमचमाती तलवार व बाये हाथ में अग्नि से धधकता खप्पर लेकर लाल रंग के वस्त्र में अष्ट्मी नवरात्री की रात्रि पहर को निकलता है रौद्ररूप में नगर भ्रमण में ?

Abhout Mr. DK Author:

DK Sharma

Mr. DK Sharma is a retired administrative officer of Chhattisgarh Government, having keen interest in archaeology, wild life, tours & travels.

Mr. Shrma’s blog is – यात्रा जिंदगी की Journey of life

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Merger of Hyderabad in India

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स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 1 वर्ष, 1 माह और 4 दिन तक हैदराबाद भारत से अलग रहा था
Merger of Hyderabad in India

  • 15 अगस्त 1947 के दिन भारत परतन्त्रता की बेड़ियों से आजाद हुआ
    आजाद होने के समय लगभग 562 देशी रियासतें ऐसी थीं जिन पर ब्रिटिश सरकार का हुकूमत नहीं था।
  • उनमें से जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर को छोडक़र अधिकतर रियासतों ने स्वेज्छा से भारत में अपने विलय की स्वीकृति दे दी।
  • जूनागढ़ का नवाब जूनागढ़ का विलय पाकिस्तान में चाहता था। नवाब के इस निर्णय के कारण जूनागढ़ में जन विद्रोह हो गया जिसके परिणामस्वरूप नवाब को पाकिस्तान भाग जाना पड़ा और जूनागढ़ पर भारत का अधिकार हो गया।
  • हैदराबाद का निजाम हैदराबाद स्टेट को एक स्वतन्त्र देश का रूप देना चाहता था इसलिए उसने भारत में हैदराबाद के विलय कि स्वीकृति नहीं दी।
  • यद्यपि भारत को 15 अगस्त 1947 के दिन स्वतन्त्रता मिल चुकी थी किन्तु 18 सितम्बर 1948 तक, याने कि पूरे 1 वर्ष, 1 माह और 4 दिन तक हैदराबाद भारत से अलग ही रहा।
  • इस पर तत्कालीन गृह मन्त्री सरदार पटेल ने हैदराबाद के नवाब की हेकड़ी दूर करने के लिए 13 सितम्बर 1948 को सैन्य कार्यवाही आरम्भ कर दिया (यद्यपि वह सैन्य कार्यवाही ही थी किन्तु उसे पुलिस कार्यवाही बतलाया गया था जिसका नाम ‘ऑपरेशन पोलो’ रखा गया था)।
  • भारत की सेना के समक्ष निजाम की सेना टिक नहीं सकी और उन्होंने 18 सितम्बर 1948 को समर्पण कर दिया। हैदराबाद के निजाम को विवश होकर भारतीय संघ में शामिल होना पड़ा।
  • सरदार पटेल शुरू से ही हैदराबाद पर सैनिक कार्यवाही करना चाहते थे किन्तु तत्कालीन प्रधान मन्त्री जवाहर लाल नेहरू सैनिक कार्यवाही के पक्ष में नहीं थे।
  • नेहरू का विचार था कि सैन्य कार्यवाही के द्वारा हैदराबाद मसले को सुलझाने में पूरा खतरा तथा अन्तर्राष्ट्रीय जटिलताएँ उत्पन्न होने की सम्भावना थी। वे चाहते थे कि हैदराबाद में की जानेवाली सैनिक कार्रवाई को स्थगित कर दिया जाए।
  • तत्कालीन गवर्नर जनरल माउंटबेटन भी नेहरू के ही पक्ष में थे। नेहरू की इस असहमति के कारण ही हैदराबाद के ऊपर सैन्य कार्यवाही करने में सरदार पटेल को इतना विलम्ब हुआ।
  • प्रख्यात कांग्रेसी नेता प्रो.एन.जी. रंगा की भी राय थी कि विलंब से की गई कार्रवाई के लिए नेहरू और माउंटबेटन जिम्मेदार हैं। रंगा लिखते हैं कि’जवाहरलाल नेहरू की सलाहें मान ली होतीं तो हैदराबाद मामला उलझ जाता’।
  • अब आप ही सोचिए कि यदि सरदार पटेल ने उस समय अपनी दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए सैन्य कार्यवाही नहीं किया होता तो क्या आज हैदराबाद भी कश्मीर की तरह से भारत के लिए हमेशा का सरदर्द नहीं बन गया होता?
  • यहाँ पर उल्लेखनीय है कि एक बार सरदार पटेल ने स्वयं श्री एच.वी.कामत को बताया था कि ”यदि जवाहरलाल नेहरू और गोपालस्वामी आयंगर कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप न करते और उसे गृह मंत्रालय से अलग न करते तो मैं हैदराबाद की तरह ही इस मुद्दे को भी आसानी से देश-हित में सुलझा लेता।”
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Cobra Facts in Hindi

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Interesting facts in Hindi

Cobra Facts

सांपों  (सर्पों), विशेषकर कोबरा  (Cobra), के बारे में अधिक से अधिक जानने का कुतूहल प्रायः लोगों में होता है।

Gyan Sagar gk में हम दे रहे हैं कोबरा  (Cobra) के बारे में जानकारी।

कोबरा तथ्य (Cobra Facts)

  • कोबरा के सैकड़ों प्रकार होते हैं जिनमें से किंग कोबरा  (नाग) भी एक है।
  • किंग कोबरा (King Cobra), जिसे कि हम नाग सांप भी कहते हैं, ही संसार का एकमात्र साँप है जो कि घोसला बनाता है, पर चिड़ियों की तरह पेड़ों पर नहीं बल्कि जमीन पर।
  • अपने घोसले में मादा किंग कोबरा (King Cobra) 20-40 अंडे देती है और उस दौरान नर किंग कोबरा (King Cobra) उसकी सतत् निगरानी रखता है।
  • मादा किंग कोबरा (King Cobra) उन अंडों को 60-90 दिनों तक सेती है।
  • किंग कोबरा (King Cobra) दूसरे सांपों को खा जाता है।
  • केवल कोबरा (Cobra) सांप ही अपने विष को थूक के रूप में अपनी लंबाई से आधी दूरी तक फेंक सकते हैं।
  • किंग कोबरा (King Cobra) संसार का सबसे लंबा जहरीला सांप होता है। नर किंग कोबरा (King Cobra) की औसत लंबाई18 फुट होती है, कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी लंबाई 20 फुट तक भी होती है।
  • कोबरा (Cobra) रात के अंधेरे में भी देख सकते हैं।
  • कोबरा (Cobra) में सूंघने की भी शक्ति होती है।
  • तापमान में होने वाले छोटे से छोटे से परिवर्तन को भी कोबरा (Cobra) अनुभव कर लेते हैं।
  • कोबरा (Cobra) का जीवनकाल 20 वर्षों का होता है।
  • नेवला और मनुष्य कोबरा (Cobra) के स्वाभाविक दुश्मन हैं।
  • कोबरा (Cobra) का विष संसार का सबसे ज्यादा जहरीला नहीं नहीं किन्तु सिर्फ एक बार काटकर कोबरा (Cobra) इतना विष छोड़ते हैं कि हाथी तक भी मर जाता है।
  • अधिकतर कोबरा (Cobra) डरपोक होते हैं और अपने आसपास मनुष्य को देखकर भाग जाते हैं या छिप जाते हैं परन्तु किंग कोबरा (King Cobra) ऐसी स्थिति में भागने या छिपने के स्थान पर आक्रामक हो जाते हैं।
  • कोबरा (Cobra) के भोजन हैं मेढक, मछली, चिड़िया, छिपकली इत्यादि।
  • कोबरा (Cobra) बहुत बुद्धिमान होते हैं और जल्दी सीख जाते हैं।
  • कोबरा (Cobra) के जहर का इलाज “antivenin” नामक दवा से किया जाता है जिसको कोबरा (Cobra) के जहर से ही बनाया जाता है।
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Interesting gk in Hindi – 1

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General Knowledge in Hindi

Interesting gk in Hindi

Gyan Sagar gk में प्रस्तुत है सामान्य ज्ञान से सम्बन्धित रोचक जानकारी (Interesting gk in Hindi)!

Gk in Hindi

  • सूर्य से पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।

    अब आप कहेंगे कि सूर्य से पृथ्वी की दूरी तो मात्र 8.3 प्रकाश मिनट है तो ऐसा कैसे हो सकता है। यह सच है कि प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में 8.3 मिनट ही लगते हैं किन्तु जो प्रकाश हम तक पहुँच रहा है उसे सूर्य के क्रोड (core) से उसके सतह तक आने में 30 हजार वर्ष लगते हैं और वह सूर्य की सतह पर आने के बाद ही 8.3 मिनट पश्चात् पृथ्वी तक पहुँचता है, याने कि वह प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।

  • अन्तरिक्ष में यदि धातु के दो टुकड़े एक दूसरे को स्पर्श कर लें तो वे स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं।

    यह भी अविश्वसनीय लगता है किन्तु यह सच है। अन्तरिक्ष के निर्वात के कारण दो धातु आपस में स्पर्श करने पर स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं, बशर्तें कि उन पर किसी प्रकार का लेप (coating) न किया गया हो। पृथ्वी पर ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि वायुमण्डल दोनों धातुओं के आपस में स्पर्श करते समय उनके बीच ऑक्सीडाइज्ड पदार्थ की एक परत बना देती है।

  • अन्तरिक्ष में ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकती।

    जी हाँ, ध्वनि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है और अन्तरिक्ष में निर्वात् होने के कारण ध्वनि को गति के लिए कोई माध्यम उपलब्ध नहीं हो पाता।

  • शनि ग्रह का घनत्व इतना कम है कि यदि काँच के किसी विशालाकार बर्तन में पानी भर कर शनि को उसमें डाला जाए तो वह उसमें तैरने लगेगा।
  • वृहस्पति इतना बड़ा है कि शेष सभी ग्रहों को आपस में जोड़ दिया जाए तो भी वह संयुक्त ग्रह वृहस्पति से छोटा ही रहेगा।
  • स्पेस शटल का मुख्य इंजिन का वजन एक ट्रेन के इंजिन के वजन का मात्र 1/7 के बराबर होता है किन्तु वह 39 लोकोमोटिव्ह के बराबर अश्वशक्ति उत्पन्न करता है।
  • शुक्र ही एक ऐसा ग्रह है जो घड़ी की सुई की दिशा में घूमता है।
  • चन्द्रमा का आयतन प्रशान्त महासागर के आयतन के बराबर है।
  • सूर्य पृथ्वी से 330,330 गुना बड़ा है।
  • अन्तरिक्ष में पृथ्वी की गति 660,000 मील प्रति घंटा है।
  • शनि के वलय की परिधि 500,000 मील है जबकि उसकी मोटाई मात्र एक फुट है।
  • वृहस्पति के चन्द्रमा, जिसका नाम गेनीमेड (Ganymede) है, बुध ग्रह से भी बड़ा है।
  • किसी अन्तरिक्ष वाहन को वायुमण्डल से बाहर निकलने के लिए कम से कम 7 मील प्रति सेकण्ड की गति की आवश्यकता होती है।
  • पृथ्वी के सारे महाद्वीप की चौड़ाई दक्षिण दिशा की अपेक्षा उत्तर दिशा में अधिक है, यह अभी तक ज्ञात नहीं है कि ऐसा क्यों है।
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Interesting Facts about Indian Railway

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Rail1way gk

प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय रेल के विषय में सामान्य ज्ञान (Railway gk) से अवगत होना ही चाहिए।

Gyan Sagar gk में हम बता रहे हैं भारतीय रेल के विषय में रोचक बातें (Interesting Facts about Indian Railway)।

भारतीय रेल – रोचक जानकारी (Interesting Facts about Indian Railway)

सन् 1832 के जमाने में जब भारत में रेल की योजना बनाते समय किसी ने सोचा भी न रहा होगा कि एक दिन भारतीय रेल सम्पूर्ण विश्व में सबसे बड़ा यात्री ट्रेन सेवा बन जाएगा। जब भारत में रेल की योजना बनी थी तो उन दिनों संसार के सिर्फ आठ देशों – ब्रिटन, फ्रांस, जर्मनी, हालैंड, इटली, स्पेन, सोवियत रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका – में ही रेल सेवा उपलब्ध थी।

सन् 1832 भारत में रेल की शुरुवात की योजना बनी तो जरूर किन्तु एक दशक से भी अधिक समय तक इस पर अमल नहीं हो पाया। सन् 1844 में भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड हार्डिंग (Lord Hardinge) ने निजी उद्योगपतियों को भारत में एक रेल प्रणाली स्थापित करने की अनुमति दी। इस अनुमति के मिलने पर ब्रिटेन के अनेक निवेशकों ने इस योजना में अपनी रुचि प्रदर्शित की जिससे ऐसी कई नई रेलवे कंपनियों का जन्म हुआ जिन्हें तत्कालीन ईस्ट इंडिया कंपनी की मदद प्राप्त थी। इस प्रकार से भारत में एक रेल प्रणाली का तेजी से निर्माण होने लगा।

भारत में पहली ट्रेन 22 दिसम्बर 1851 को रुड़की में चली जो कि एक मालगाड़ी थी तथा निर्माण सामग्री ढोने का कार्य करती थी।

रेलगाड़ियों के शंटिंग के लिए पहला लोकोमोटिव्ह बंबई में सन् 1852 में बना और उसके बाद 16 अप्रैल 1853 को पहली बार बोरी बंदर से थाने बीच एक यात्री ट्रेन ने 34 कि.मी. (21 मील) की दूरी तय की थी। इस प्रथम रेलगाड़ी के 14 डिब्बों (carriages) में 400 यात्रियों ने यात्रा की थी। इस पैसेंजर गाड़ी को ही औपचारिक रूप से भारत में रेल सेवा का जन्म माना जाता है।

भारत में रेल प्रणाली आरम्भ होने के दिनों में लगभग 175 अलग-अलग रल्वे बन गए जिनमें से अधिकांश पर ब्रिटेन के अनेक निवेशकों का तथा कुछ पर भारत के राजा-महाराजों का स्वामित्व था। उन सभी रेल्वेज़ के अपने-अपने मार्ग तथा अपनी-अपनी समय-सारणियाँ हुआ करती थीं। इस कारण से यात्रियों को अपने गंतव्य स्थानों में पहुँचने तक कई बार अलग-अलग स्थानों में रुकना जरूरी होता था और कई बार तो भयानक जंगलों में भी रात्रि व्यतीत करना पड़ जाता था। बावजूद इसके. लोग उस जमाने के जानवरों के द्वारा परिचालित परिवहनों की अपेक्षा, रेलगाड़ी से ही सफर करना पसंद किया करते थे। कई बार तो एक रेल्वे की सीमा खतम होने के बाद दूसरी रेल्वे की गाड़ी पकड़ने के लिए मीलों तक की यात्रा करने के लिए स्वयं ही व्यवस्था करनी पड़ती था।

रेलगाड़ियों में चार दर्जे होते थे – पहला दर्जा, ड्यौढ़ा दर्जा, दूसरा दर्जा और तीसरा दर्जा जिनमें से पहले दो में सिर्फ अंग्रेज और भारतीय रईस ही सफर करते थे।  एक लंबे अरसे तक रेलगाड़ियों में संडास की सुविधा नहीं थी, इस सुविधा की शुरुवात पहले दरजे के लिए सन् 1891 में और निचली दर्जों के लिए सन् 1907 में हुई।

यात्रियों को होने वाली असुविधाओं को ध्यान में रखकर तत्कालीन शासन ने एक केन्द्रीय रेल्वे की स्थापना के लिए सन्  1920 में एक कमेटी का गठन किया जिसके परिणामस्वरूप भारत के विभिन्न रेल्वे का एक केन्द्रीय रेल्वे में विलय कर दिया गया। उन दिनों केन्द्रीय रेल्वे के तहत लगभग 7,10,000 कर्मचारी, अधिकारी आदि कार्य करते थे जिनमें से लगभग 7,00,000 भारतीय थे और शेष यूरोपियन जो कि प्रायः अधिकारी थे।

उन दिनों राजा-महाराजाओं, नवाबों आदि को रेल्वे में विशिष्ट सुविधाए प्राप्त थीं। पटियाला के महाराजा ने कर्नल बाउल्स (Colonel Bowles) नामक रेल्वे इंजीनियर से अपने लिए एक विशेष रेलगाड़ी बनवाई थी जो कि सिर्फ एक पटरी (monorail) पर दौड़ती थी। समूचे विश्व में एक पटरी पर दौड़ने वाली वह अकेली रेलगाड़ी थी। उस रेलगाड़ी के 500 मील लंबे ट्रैक का रख-रखाव महाराजा के सेना के द्वारा हुआ करता था। आठ डिब्बे वाली उस रेलगाड़ी की गति आठ मील प्रति घंटा हुआ करता था।

मैसूर के महाराजा ने अपने लिए एक आनन्ददायक सैलून बनवाया था जिसमें वे अपने पूरे लाव-लश्कर और नौकर-चाकरों के साथ यात्रा किया करते थे। उस सैलून को रेल की विभिन्न पटरियों पर उठाकर रखा जाता था और उसमें अलग-अलग चौड़ाई वाली ट्रैकों पर चलने के लिए सैलून के पहियों की बीच की दूरी कम या अधिक करने की सुविधा थी। समूचा सैलून मैसूर राज्य के उत्तम गुणवत्ता वाले सागौन लकड़ी का बना था जिसके ऊपर मैसूर राज्य के प्रतीक चिह्न युक्त का चांदी का शिखर था। उस सैलून के बरामदों (verandahs) में पीतल के पेंचदार रेलिंग लगे हुए थे, फर्श तथा दीवारें कीमती गलीचों से मढ़ीं थीं तथा उसमें आठ इंच मोटे मखमल के गद्दे वाले वैभवशाली पलंग तथा बहुमूल्य कुर्सियाँ भी थीं।

इसके विपरीत हैदराबाद के निजाम, जो कि उस काल के विश्व के सबसे धनाड्य लोगों में से एक थे, का निजी सैलून अत्यन्त ही सामान्य था, यहाँ तक कि उस सेलून में एक कुर्सी तक न थी। उसमें केवल एक गलीचा था जिस पर बैठकर वे अपनी नित्य प्रार्थना तथा कुरान का पाठ किया करते थे। उस कोच में वे अकेले ही यात्रा किया करते थे।

इन सैलूनों तथा कोचों को तत्कालीन अन्य अनेक दुर्लभ निजी सैलूनों के साथ आज भी नई दिल्ली के रेल परिवहन संग्रहालय में देखा जा सकता है। इस संग्रहालय में एक जोड़ा मोटर कार ऐसा है जिसे कि पेट्रोल इंजन के द्वारा चलाने के साथ ही साथ रेलगाड़ियों के साथ भी जोड़ा जा सकता था।

वास्तव में देखा जाए तो भारत से लूटे गए धन से ही इंगलैंड में अनेक कल-कारखाने खुले जिनमें लंकाशायर और मनचेस्टर में भाफ के इंजिनों से चलने वाले अनेक कारखाने भी थे। भारत से प्राप्त धन से ही इंग्लिस्तान सम्पन्न बना और वहाँ अनेक आधुनिक सुविधाओं का विकास हुआ फिर भी भारत में रेल सुविधा की शुरुवात नहीं करना चाहते थे। परन्तु शासन को बरकरार रखने के लिए उन्हें अपनी सेना को उनके सामान के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना उनकी मजबूरी थी। उन दिनों जितने आदमियों को माल के साथ रेलगाड़ी में 16 घंटे में जितनी दूरी तक ले जाया जा सकता था उतनी दूरी को 2,500 ऊँट एक पखवाड़े में भी तय नहीं कर पाते थे। इसलिए भारत में रेल सुविधा शुरू करना अंग्रेजों की विवशता बन गई जिसके परिणामस्वरूप भारत में उन्हें रेल सुविधा की शुरुवात करनी पड़ी।

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Interesting facts 1

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Science gk

Interesting Facts in Hindi

विज्ञान (Science) एक रोचक विषय है। इस विषय की अनेक जानकारी ऐसी हैं जिन्हें जानकर आश्चर्य होने लगता है।

Gyan Sagar gk में प्रस्तुत है विज्ञान सम्बन्धित रोचक जानकारी (Science Facts)!

विज्ञान से सम्बन्धित रोचक तथ्य (Science Facts)

  • ब्रह्माण्ड में 100 अरब आकाश गंगाएँ हैं।
  • वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार पृथ्वी का जन्म 4.56 अरब वर्ष पहले हुआ था।
  • सूर्य से पृथ्वी तक आने में प्रकाश को 8 मिनट 17 सेकंड लगते हैं।
  • प्रकाश की गति 186,000 मील प्रति सेकंड है।
  • पृथ्वी अपनी धुरी पर 1000 मील प्रति घण्टे की गति से घूमती है और
  • अन्तरिक्ष में 67,000 मील प्रति घण्टे की गति से चक्कर लगाती है।
  • प्रतिवर्ष दस लाख भूकंप पृथ्वी को कँपाते हैं।
  • अब तक गिरे ओलों में सबसे बड़े ओले, जो कि बांग्लादेश में सन् 1986 में गिरा था, का वजन 1 किलो था।
  • गाज गिरने के कारण प्रतिवर्ष लगभग 1000 लोग मरते हैं।
  • DNA की खोज Swiss Friedrich Mieschler ने सन् 1869 में की थी।
  • वाट्सन (Watson) और क्रिक (Crick) ने सन् 1953 में DNA की आण्विक संरचना सुनिश्चित की थी।
  • थर्मामीटर की खोज सन् 1607 में गैलेलियो (Galileo) ने की थी।
  • आवर्धक लैंस (magnifying glass) की खोज इंग्लिशमैन रोगर बैकन  (Englishman Roger Bacon) ने सन् 1250 में की थी।
  • बारूद (dynamite) का आविष्कार अल्फ्रेड नोबल (Alfred Nobel) ने सन्  1866 में किया था।
  • भौतिक शास्त्र के लिए नोबल पुरस्कार प्रथम बार सन् 1895 में विल्थेलम रोन्टगन (Wilhelm Rontgen) को एक्स-रे की खोज के लिए मिला था।
  • क्रिश्चन बर्नाड (Christian Barnard) ने सन् 1967 में पहली बार हृदय प्रतिरोपण (heart transplant) किया था।
  • एक विद्युत पैदा करने वाली मछली  650 वोल्ट तक बिजली पैदा कर सकती है।
  • मनुष्य के पेट में पाया जाने वाला टेपवर्म (tapeworm) नामक कृमि  22.9 मीटर तक लंबा हो सकता है।
  • चिंपांजी 300 अलग अलग संकेतों को समझने की बुद्धि रखते हैं।
  • एबोला वायरस (Ebola virus) से इन्फेक्टेड प्रति 5 व्यक्तियों में स 4 की मृत्यु हो जाती है।
  • मनुष्य के शरीर में 60,000 मील लम्बी रक्त नलिकाएँ होती हैं।
  • एक रक्त कोशिका को सम्पूर्ण शरीर का एक चक्कर लगाने के लिए लगभग 60 सेकंड का समय लगता है।
  • टेलीफोन के आविष्कारक अलेक्जेंडर ग्राहम बेल (Alexander Graham Bell) की मृत्यु के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को दफनाते समय उन्हे श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से सम्पूर्ण  US में  1 मिनट के लिए टेलीफोन सिस्टम को बंद रखा गया था।
  • चुम्बन लेने की अपेक्षा हाथ मिलाने में अधिक जर्म्स स्थानान्तरित होते हैं।
  • आकाश से गिरने वाली वर्षा की बूंदों की गति 18 मील प्रति घण्टे तक होती है।
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Amazing Facts 1

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Amazing Facts about Languages

Amazing Facts in Hindi

विभिन्न भाषाओं में अनेक रोचक तथ्य (Amazing Facts) मिलते हैं। यहाँ पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं ऐसी ही कुछ रोचक जानकारी!

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भाषाओं से सम्बन्धित रोचक जानकारी

  • हवायन (Hawaiian) वर्णामाला में केवल 12 अक्षर होते हैं।
  • उर्दू और अंग्रेजी दोनों के ही वर्णमालाओं में 26 अक्षर होते हैं।
  • ‘हरि’ हिन्दी का एक ऐसा शब्द है जिसके दर्जन भर से भी अधिक अर्थ हैं; यथा यमराज, पवन, इन्द्र, चन्द्र, सूर्य, विष्णु, सिंह, किरण, घोड़ा, तोता, साँप, वानर और मेढक, वायु, उपेन्द्र आदि।
  • राजभाषा अधिनियम के अनुसार हिन्दी भाषा के लिए देवनागरी लिपि तथा भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप प्रयोग किया जाता है।
  • हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई धर्मों के आराधनागृह हैं क्रमशः MANDIR, MASJID और CHURCH; ये सभी शब्द अंग्रेजी के 6 अक्षरों वाले हैं। उसी प्रकार से इन तीनों धर्मों के पवित्र गंथ हैं GEETA, QURAN और BIBLE और ये सभी अंग्रेजी के 5 अक्षरों से बने हैं।
  • अंग्रेजी का शब्द ‘News’ चार दिशाओं North, East, West, और South के प्रथम अक्षरों को मिला कर बना है।
  • अमेरिका की अपेक्षा चीन में अधिक लोग अंग्रेजी भाषा बोलते हैं।
  • ‘racecar,’ ‘kayak’ और ‘level’ अंग्रेजी के ऐसे शब्द हैं जिन्हें चाहे बायें से दायें पढ़ें कि दायें से बायें, वे एक जैसे ही पढ़े जाते हैं।
  • WAS IT A CAR OR A CAT I SAW. अंग्रेजी का ऐसा वाक्य है जो उल्टा सीधा एक समान है।
  • अंग्रेजी शब्द Stressed को उल्टा पढ़ने पर अंग्रेजी का ही एक दूसरा शब्द Desserts बन जाता है।
  • अंग्रेजी का सबसे छोटा पूर्ण वाक्य है – ‘Go’।
  • अंग्रेजी के केवल चार शब्द ऐसे हैं जिसके अन्त में “dous” आता है, वे हैं – hazardous, horrendous, stupendous, and tremendous।
  • “The quick brown fox jumps over a lazy dog.” वाक्य में अंग्रेजी के सभी अक्षर प्रयुक्त होते हैं।
  • बगैर कोई स्वर (vowel) वाला अंग्रेजी का सबसे बड़ा शब्द है “Rhythms”!
  • “uncopyrightable” अंग्रेजी का एक ऐसा शब्द है जिसमें प्रयुक्त कोई भी अक्षर दो बार नहीं आता।
  • अंग्रेजी में ‘E’ का प्रयोग सबसे अधिक होता है और ‘Q’ का सबसे कम।
    अंग्रेजी का सबसे लंबा शब्द है – pneumonoultramicroscopicsilicovolcanoconioses! (न्युमोनोअल्ट्रामाइक्रोस्कोपिकसिलिकोव्होल्कानोकोनिओसेस)
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