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Goal setting is must to get success – Motivational article in hindi

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सफलता प्राप्ति के लक्ष्य निर्धारित करना अत्यावश्यक (Goal setting is must to get success – Motivational article in hindi)

प्रत्येक व्यक्ति कुछ न कुछ चाहता है। कोई धन कमाना चाहता है तो कोई नाम कमाना चाहता है; कोई इंजीनियर बनना चाहता है तो कोई डॉक्टर बनना चाहता है।

और अधिकतर लोग यह भी उम्मीद करते हैं कि वे जो चाहते हैं वह हो जाए, याने कि अपने आप हो जाए, उसे कुछ करना ना पड़े।

किन्तु मित्रों, अपने आप कुछ भी नहीं होता। अपनी चाहत को सफल (success) बनाने के लिए हमें अथक परिश्रम करना ही पड़ता है।

सबसे पहली बात तो यह है कि यदि किसी कार्य में हमें सफलता प्राप्त करनी है तो उसके लिए हमें लक्ष्य निर्धारित (goals setting) भी करने होंगे। हमारे द्वारा निर्धारित लक्ष्य ही सफलता के मार्ग में हमारा मार्गदर्शन करके हमें सफल बनायेंगे। लक्ष्य निर्धारण (goals setting) वह प्रक्रिया है जो कि किसी वस्तु की कामना करने की पहली सीढ़ी से आरम्भ होकर अपनी कामना को प्राप्त कर लेने की आखरी सीढ़ी पर समाप्त होती है। इन पहली और आखरी सीढ़ी के बीच बहुत सारी सीढ़ियाँ आती हैं जिन पर पूरे लगन, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम के साथ चढ़ना पड़ता है। ऐसा कभी हो ही नहीं सकता कि बीच की सीढ़ियों पर कदम रखे बगैर आप पहली सीढ़ी से आखरी सीढ़ी पर पहुँच जाएँ।

हमारे द्वारा निर्धारित लक्ष्य हमें बताते हैं कि हमें सफलता मिल रही कि नहीं। अब आप पूछेंगे कि कैसे? तो मान लीजिए कि मैं लेखन के जरिये धनार्जन करता हूँ। एक साधारण लेख के लिए रु.200 मिलते हैं जबकि एक उत्तम लेख के लिए रु.500। मैं महीने में 50 साधारण लेख लिखकर रु.10000 कमा लेता हूँ। अब मैं इस कमाई को बढ़ाना चाहता हूँ। इसके लिए मेरे दो लक्ष्य होंगे – पहला मैं महीने में 50 से अधिक लेख लिखूँ और दूसरा मैं अपने लेखों का स्तर साधारण से उत्तम करूँ। अब अपने इन लक्ष्यों को ध्यान में रखकर मैं लेखन कार्य करता हूँ और अगले माह मैं रु.15000 कमा लेता हूँ तो इसका अर्थ हुआ कि मुझे सफलता मिल रही है।

जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए जितना लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है उतना ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करना भी जिसके लिए भरपूर लगन, आत्मविश्वास तथा कठिन परिश्रम की आवश्यकता होती है।

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What is Personality

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व्यक्तित्व विकास (Personality Development) की बातें करने के पहले यह जानना आवश्यक है कि आखिर व्यक्तित्व (Personality) है क्या?

अक्सर आपने सुना होगा कि किसी की सफलता (success) के पीछे उसके व्यक्तित्व (Personality) का बहुत बड़ा योगदान होता है; यदि जीवन में सफलता (success) प्राप्त करना है तो अपने व्यक्तित्व (Personality) का विकास करना ही होगा।

किन्तु एक सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर व्यक्तित्व (Personality) है क्या चीज? क्योंकि यदि हम यही नहीं जानेंगे कि व्यक्तित्व (Personality) क्या है तो फिर उसका विकास कैसे कर पायेंगे?

व्यक्तित्व (Personality) शब्द व्यक्ति शब्द से बना है। देखा जाये तो प्रायः सभी व्यक्ति एक समान होते हैं; सभी में समान मानवीय गुण होते हैं, सभी का शरीर एक समान होता है, एक व्यक्ति उन्हीं भावनाओं का अनुभव करता है जिसे कि दूसरा व्यक्ति करता है।

किन्तु यह भी सच है कि सभी व्यक्ति अपने आचार-व्यवहार में एक दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं। दो व्यक्ति कभी भी एक दूसरे के बिल्कुल अनुरूप नहीं होते। कोई व्यक्ति अपने जीवन में ठीक वैसा ही अनुभव नहीं कर सकता जैसा कि किसी दूसरे व्यक्ति ने किया हो। दो व्यक्तियों के विचार भी कभी भी बिल्कुल एक समान नहीं हो सकते। यहाँ तक कि जुड़वाँ भाई या बहनों तक के भी नहीं।

तो यह कहा जा सकता है कि वह वस्तु जो किसी व्यक्ति को अन्य व्यक्तियों से अलग बनाती है ही व्यक्तित्व (Personality) है।

किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व ऐसा होता है कि उसे सभी पसन्द करते हैं और इससे उलटे ऐसा भी होता है कि कोई व्यक्ति ऐसा भी होता है जिसे कोई भी पसन्द नहीं करता। जीवन में सफल वही व्यक्ति होता है जिसका व्यक्तित्व (Personality) प्रभावशाली हो तथा जिसे अधिक से अधिक लोग पसन्द करें।

व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने को ही व्यक्तित्व विकास (Personality Development) के रूप में जाना जाता है। आजकल अच्छा कैरियर (career) प्राप्त करने के लिए व्यक्तित्व विकास (Personality Development) को अनिवार्य माना जाता है।

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Fear of unknown

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Personality Development

Gyan Sagar gk में हम Personality Development के अन्तर्गत बता रहे हैं “अज्ञात का भय” (Fear of Unknown) के बारे में!

अज्ञात का भय

Personality Development

प्रायः रोज ही हमसे हमारे परिजन, परिचत तथा मित्र रोज ही सैकड़ों प्रकार के प्रश्न पूछते हैं और उन्हें उत्तर देकर या जवाब न मालूम होने पर बिना उत्तर दिए हम उन लोगों को सन्तुष्ट कर देते हैं। ऐसा करने में कभी भी हमें किसी प्रकार का भय नहीं होता। किन्तु यदि हमें किसी साक्षात्कार के लिए, जहाँ कि इसी प्रकार के सवाल ही पूछे जाने हैं, जाना पड़े तो भय होने लगता है। किसका भय होता है यह?

परिजनों और मित्रों से रोज ही कुछ न कुछ बोलते हैं किन्तु यदि हमें मंच में बुला कर माइक पकड़ा दिया जाए तो हम भय के कारण बोल नहीं पाते। किसका भय है यह?

हम लोगों में अधिकांश लोगों को इस प्रकार के भय होते ही रहते हैं। कुछ लोगों को तो किसी अपरिचित से बात करने में भी भय होता है। ऐसे भय को अज्ञात का भय कहा जाता है। “अज्ञात का भय” (Fear of Unknown) याने कि हमें यह ज्ञात ही नहीं है कि हम किससे डर रहे हैं।

प्रायः जब हमें किसी अनभिज्ञ व्यक्ति से मिलना होता है या किसी अनभिज्ञ माहौल से गुजरना होता है तो ही हमारे भीतर अज्ञात का भय उत्पन्न होता है। याने कि अज्ञात का भय वास्तव में हमारी अनभिज्ञता का भय होता है।

इस अज्ञात के भय (Fear of Unknown) का मूल कारण क्या है?

हमारे शरीर में एक निश्चित सुरक्षा केन्द्र होता है जो कि हमें विभिन्न खतरों की चेतावनी देता है। एक बच्चा ज्यों-ज्यों बड़ा होता है त्यों-त्यों उसे अपने माता-पिता तथा गुरुजनों की शिक्षा के द्वारा तथा अपने स्वयं के अनुभवों से जीवन के विभिन्न खतरों का ज्ञान होते जाता है तथा वे विभिन्न खतरे हमारे शरीर के सुरक्षा केन्द्र के डेटाबेस में संकलित होते जाते हैं। ये खतरे ही हमारे भीतर भय पैदा करते हैं। जब किसी बच्चे को भूत-प्रेत इत्यादि के विषय में उसके गुरुजन बताते हैं तो वह भूत-प्रेत आदि को खतरा समझने लगता है और यह खतरा उसके शरीर के भीतर का सुरक्षा केन्द्र डेटाबेस में चला जाता है। पाप और पुण्य का भय भी बचपन में मिली सीख का ही परिणाम होते हैं।

यहाँ पर यह कहना भी अनुपयुक्त नहीं होगा कि यह सुरक्षा केन्द्र प्रायः सभी प्राणियों के शरीर में पाया जाता है। आपने देखा होगा कि कुत्ता जब कुछ खाते रहता है तो उसका ध्यान खाने से अधिक इस बात पर रहता है कि कहीं कोई खतरा न आ जाए। अन्य प्राणियों तथा मनुष्य में अन्तर यह है कि अन्य प्राणी केवल अपने अनुभवों से ही खतरों के बारे में जानते हैं किन्तु मनुष्य को खतरों की जानकारी अपने अनुभव के साथ ही साथ गुरुजनों की सीख से भी मिलती है। यही कारण है कि मनुष्य को भूत-प्रेत जैसी अदृश्य और काल्पनिक चीजों का भी भय होता है जबकि अन्य प्राणियों में यह भय होता ही नहीं है।

अस्तु, हमारे शरीर का सुरक्षा केन्द्र जब कभी भी हमें किसी प्रकार के खतरे की चेतावनी देता है तो हम चिन्तित और किसी सीमा तक भयभीत हो जाते हैं।

यह अज्ञात का भय हमारे लिए अनावश्यक तो है ही, हमारे जीवन पद्धति के लिए हानिकर भी है। हानिकर इस प्रकार से है कि जब भी हम भयभीत होते हैं हमारे हृदय की धड़कन सामान्य से कई गुना अधिक हो जाती है, मुँह सूख जाता है, सही प्रकार से न बोलकर हकलाने लगते हैं यहाँ तक कि सही प्रकार से सोच भी नहीं सकते। ये सारे लक्षण हमें अस्वस्थ बनाते हैं।

इस अनावश्यक भय को खत्म कर देना ही बेहतर है अन्यथा यह हमारे जीवन पद्धति को अत्यन्त दुरूह बना सकती है। अज्ञात के इस भय को दूर करना कुछ मुश्किल तो है किन्तु असम्भव नहीं। यदि आप स्वयं में अधिक से अधिक आत्मविश्वास उत्पन्न कर लें तो यह भय अपने आप ही खत्म हो जाएगा।

भय की बात चली है तो यह बताना भी उचित होगा कि कुछ प्रकार के भय हमारे जीवन के लिए आवश्यक होते हैं और कुछ अनावश्यक। समाज में दण्ड का विधान रखने का उद्देश्य है भय उत्पन्न कर के मनुष्य को सामाजिक मर्यादाओं का पालन करवाना। पाप और पुण्य का भय हमें नैतिकता प्रदान करते हैं। ऐसे ही और भी अनेक भय हैं जो कि मनुष्य के कल्याण के लिए बनाए गए हैं।

आशा है कि Gyan Sagar gk के अन्तरगत् Personality Development से सम्बन्धित यह जानकारी आपको पसन्द आई होगी।

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