Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) जिसे सिन्धु घाटी सभ्यता (Sindhu Vally Civilization) के नाम से भी जाना जाता है के ज्ञान के बिना इतिहास सामान्य ज्ञान (history gk in hindi) अधूरा है।

हिन्दी में सामान्य ज्ञान (general knowledge hindi) की जानकारी देनेवाली Gyan Sagar gk में हम आज हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) या सिन्धु घाटी सभ्यता (Sindhu Vally Civilization) के विषय में चर्चा कर रहे हैं।

हड़प्पा सभ्यता इतिहास सामान्य ज्ञान (History general knowledge in Hindi)
Hadappa Civilization - History gk in Hindi

हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) की खोज

  • हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) या सिन्धु घाटी सभ्यता (Sindhu Vally Civilization) केवल भारत की ही नहीं बल्कि समस्त संसार की कांस्यकालीन सभ्यताओं में एक महान सभ्यता थी।
  • हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) या सिन्धु घाटी सभ्यता (Sindhu Vally Civilization) एक पूर्णतः सुविकसित नगरीय (Urban) थी जो कि मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं के समकालीन थी।
  • हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) या सिन्धु घाटी सभ्यता (Sindhu Vally Civilization) का जन्म ताम्र-पाषाण पृष्ठभूमि में भारत के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में हुआ था।
  • सबसे पहले सन् 1921 में रायबहादुर दयाराम साहनी एवं माधोस्वरूप वत्स ने मांटगुमरी जिले में हड़प्पा, जो कि वर्तमान में पाकिस्तान में है, नाम के स्थान में पुरातात्विक उत्खननों द्वारा एक प्राचीन सभ्यता के अवशेष की खोज की।
  • उसके एक वर्ष बाद सन् 1922 में राखालदास बनर्जी ने सिंध प्रान्त के लरकाना जिले में मोहनजोदड़ो में कुछ प्राचीन अवशेषों को खोज निकाला।
  • दोनों ही स्थानों से प्राप्त होने वाली मुहरें, उप्पे, लिपयाँ तथा कलाकृतियों में पूरी समानता थी।
  • प्रारम्भ में प्राचीन सभ्यता के अधिकतम अवशेष सिन्धु घाटी में तथा सिन्धु नदी की सहायक नदियों के मैंदान में पायी गईं, इसलिए विद्वानों ने उस सभ्यता का नाम सिन्धु घाटी सभ्यता (Sindhu Vally Civilization) रख दिया।
  • किन्तु बाद में किये गये अनुसन्धानों से स्पष्ट हुआ कि उस सभ्यता का विस्तार सिर्फ सिन्धु घाटी में सीमित न होकर राजस्थान, हरयाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी पंजाब एवं गुजरात जैसे क्षेत्रों तक थी। इस कारण से विद्वानों ने उस सभ्यता का नाम, उस सभ्यता के बारे में सबसे पहले जाने वाले स्थान हड़प्पा के आधार पर, हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) कर दिया।

हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) का काल निर्धारण

  • मेसोपोटामिया के उर और किश नामक स्थानों से प्राप्त हड़प्पा सभ्यता की मुद्राओं को हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) के काल निर्धारण का आधार माना गया। इस आधार पर मार्शल ने यह मत व्यक्त किया कि यह सभ्यता ई.पू. 3250 से ई.पू. 2750 तक फूलती-फलती रही।
  • व्हीलर ने हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) का काल ई.पू. 2500-1500 बताया।
  • बाद में काल निर्धारण की रेडियो कार्बन विधि का आविष्कार हो जाने पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि आरम्भिक हड़प्पा काल लगभग ई.पू. 3500 से ई.पू. 2600 तक रहा; परिपक्व या पूर्ण विकसित हड़प्पा काल लगभग ई.पू. 2600 से ई.पू. 1900 तक रहा और उत्तर हड़प्पा काल लगभग ई.पू. 1900 से ई.पू. 1300 तक रहा।
  • सरल शब्दों में कहा जाये तो हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) ईसवी सन् आरम्भ होने से लगभग तीन हजार वर्ष पुरानी है अर्थात यह सभ्यता आज से लगभग पाँच हजार साल पुरानी है।

हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) का विस्तार

  • हड़प्पा सभ्यता एक विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई थी जिसके अन्तर्गत् पंजाब, सिन्ध, बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमान्त भाग सम्मिलित थे।
  • हड़प्पा सभ्यता का विस्तार उत्तर में जम्मू से दक्षिण में नर्मदा के मुहाने तक और पश्चिम में बलूचिस्तान के मकरान समुद्र तट से उत्तर-पूर्व में मेरठ तक था।
  • हड़प्पा सभ्यता, जिसका क्षेत्रफल लगभग 1250000 वर्ग कि.मी. है, एक त्रिभुज के आकार का है।
  • हड़प्पा सभ्यता का कुल भौगोलिक क्षेत्र मिस्र की सभ्यता के क्षेत्र से 20 गुना और मिस्र एवं मेसोपोटामिया दोनों ही सभ्यताओं के सम्मिलित क्षेत्र से 12 गुना बड़ा है।
  • सन् 1947 में भारत के बँटवारे के समय तक हड़प्पा सभ्यता की सिर्फ 40 बस्तियों की जानकारी मिल पायी थी किन्तु वर्तमान समय तक हड़प्पा सभ्यता से सम्बन्धित लगभग 1400 बस्तियों का पता लगाया जा चुका है; जिनमें से लगभग 925 बस्तियाँ भारत में और शेष पाकिस्तान में स्थित हैं।
  • हड़प्पा सभ्यता की 40 बस्तियाँ सिन्धु और उसकी सहायक नदियों के क्षेत्र में, 1100 बस्तियाँ, अर्थात् हड़प्पा सभ्यता की कुल बस्तियों की 80% बस्तियाँ, सिन्धु तथा गंगा के बीच के मैदान, जहाँ कभी सरस्वती नदी बहती थी, में और लगभग 250 बस्तियाँ भारत में सरस्वती नदी प्रणाली के क्षेत्र में पायी गयी हैं जिनमें से कुछ गुजरात और कुछ महाराष्ट्र में हैं।
  • हड़प्पा सभ्यता के इस विशाल विस्तार से स्पष्ट हो जाता है कि ई.पू. 3000-2000 के काल में समस्त संसार में किसी भी सभ्यता का क्षेत्र हड़प्पा सभ्यता के क्षेत्र से बड़ा नहीं था।

हड़प्पा सभ्यता (Hadappa Civilization) के प्रमुख केन्द्र

  • हड़प्पा सभ्यता के अब तक उपलब्ध क्षेत्रों आरम्भिक अवस्था, परिपक्व अवस्था और उत्तर अवस्था, तीनों ही अवस्थाओं, के क्षेत्र शामिल हैं।
    परिपक्व अवस्था वाले क्षेत्र में से कुछ को ही नगर की संज्ञा दी जा सकती है और नगरों की संख्या सीमित है।
  • परिपक्व अवस्था वाले नगरों में पंजाब में हड़प्पा और सिन्ध में मोहनजोदड़ो सबसे अधिक महत्वपूर्ण नगर हैं। यह दोनों ही क्षेत्र वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित हैं।
  • हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के बीच की दूरी 483 कि.मी. है और यह दोनों सिन्धु नदी के द्वारा जुड़े हुए हैं।
  • पंजाब के मांटगुमरी जिले में रावी नदी के तट पर स्थित हड़प्पा नगर के आकार एवं वहाँ से उपलब्ध वस्तुओं की विविधता के आधार पर कहा जा सकता है कि यह नगर विस्तृत सिन्धु सभ्यता के उत्तरी भाग की राजधानी रहा होगा।
  • हड़प्पा नगर उस काल में मध्य एशिया, अफगानिस्तान तथा जम्मू को आपस में जोड़ने वाले महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के मध्य में स्थित था।
  • सिन्ध प्रान्त के लरकाना जिले में सिन्धु घाटी नदी के किनारे बसे मोहनजोदड़ो को हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी बस्ती माना जाता है।
  • मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिट्टी की सात परतें पायी गई हैं जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि यह नगर सात बार उजड़ा और बसा होगा।
  • मोहनजोदड़ो से प्राप्त अवशेषों से ही हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना, गृह-निर्माण, मुद्रा, मुहरों आदि के बारे में अधिकांश जानकारी मिली है।
    विद्वानों के मतानुसार मोहनजोदड़ो एक बड़ा व्यापारिक केन्द्र, अन्तर्राष्ट्रीय नगर और हड़प्पा सभ्यता के दक्षिणी प्रान्त की राजधानी था।
  • चन्हुद|ड़ो, गणवारीवाला, लोथल, धौलावीरा, कालीबंगा, बनावली, राखी गढ़ी, सुकागेंडोर, सुरकोटदा, रंगपुर, रोज्दी आदि हड़प्पा सभ्यता के अन्य महत्वपूर्ण नगर थे।
  • हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, चन्हुदड़ो, लोथल, कालीबंगा और बनावली परिपक्व एवं उन्नत हड़प्पा सभ्यता के नगर थे।
  • कालीबंगा और बनावली से हड़प्पा पूर्व तथा हड़प्पा कालीन दोनों ही समय के अवशेष मिले हैं।
  • सुतकागेंडोर और सुरकोटदा में नगर दुर्ग होने के साक्ष्य पाये गये हैं।
  • धौलावीरा में भी एक किले के अवशेष मिले हैं।

हड़प्पा सभ्यता की विशेषताएँ

  • नगर योजना एवं संरचनाएँ
  • गृह स्थापत्य
  • सड़कें तथा नालियाँ
  • दुर्ग
  • सार्वजनिक भवन
  • विशाल स्नानागार
  • विशाल अन्नागार
  • विशाल भवन
Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail