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क्या आप भारत (India) से सम्बन्धित निम्न रोचक तथ्यों (interesting facts) को जानते हैं?

भारत के विषय में रोचक तथ्य

  • भारत सदा से ही शान्तिप्रिय, सभ्य, सुसंस्कृत औ विद्वता में अग्रणी देश रहा है यही कारण है कि अपने लाखों वर्षों के इतिहास में भारत ने कभी भी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया।
  • यदि हम 5000 वर्ष पहले के इतिहास में झाँके तो पायेंगे कि उन दिनों विश्व के अधिकतर देशों के लोग असभ्य थे, जंगलों में रहा करते थे और खानाबदोश जीवन बिताते थे जबकि उन्हीं दिनों भारत के निवासियों ने सिन्धु घाटी में हड़प्पा संस्कृति की स्थापना की थी।
  • भारत पर आक्रमण करने वाले ईरानी आक्रमणकारियों ने “सिन्धु” को “हिन्दु” नाम दे दिया जिसके कारण भारत को “हिन्दुस्थान” कहा जाने लगा।
  • अंग्रेजों ने “सिन्धु” नदी को “इण्डस” (Indus) नाम दिया जिसके कारण भारत को “इन्डिया” (India) कहा जाने लगा।
  • विश्व को “शून्य” भारत ने ही दिया।
  • बोधायन ने क्षेत्रफल से सम्बन्धित रेखागणित के अनेक सूत्रों का प्रतिपादन किया जिनमें से पाइथागोरस का साध्य कहलाने वाला थ्योरम भी है।
  • नौवहन की कला और नौवहन का जन्‍म 6000 वर्ष पहले सिंध नदी में हुआ था। दुनिया का सबसे पहला नौवहन संस्‍कृ‍त शब्‍द नव गति से उत्‍पन्‍न हुआ है। शब्‍द नौ सेना भी संस्‍कृत शब्‍द नोउ से हुआ।
  • भास्‍कराचार्य ने खगोल शास्‍त्र के कई सौ साल पहले पृथ्‍वी द्वारा सूर्य के चारों ओर चक्‍कर लगाने में लगने वाले सही समय की गणना की थी। उनकी गणना के अनुसार सूर्य की परिक्रमा में पृथ्‍वी को 365.258756484 दिन का समय लगता है।
  • भारतीय गणितज्ञ बुधायन द्वारा ‘पाई’ का मूल्‍य ज्ञात किया गया था और उन्‍होंने जिस संकल्‍पना को समझाया उसे पाइथागोरस का प्रमेय करते हैं। उन्‍होंने इसकी खोज छठवीं शताब्‍दी में की, जो यूरोपीय गणितज्ञों से काफी पहले की गई थी।
  • बीज गणित, त्रिकोण मिति और कलन का उद्भव भी भारत में हुआ था। चतुष्‍पद समीकरण का उपयोग 11वीं शताब्‍दी में श्री धराचार्य द्वारा किया गया था। ग्रीक तथा रोमनों द्वारा उपयोग की गई की सबसे बड़ी संख्‍या 106 थी जबकि हिन्‍दुओं ने 10*53 जितने बड़े अंकों का उपयोग (अर्थात 10 की घात 53), के साथ विशिष्‍ट नाम 5000 बीसी के दौरान किया। आज भी उपयोग की जाने वाली सबसे बड़ी संख्‍या टेरा: 10*12 (10 की घात12) है।
  • बीज गणित, त्रिकोण मिति और कलन का अध्‍ययन भारत में ही आरंभ हुआ था।
  • ‘स्‍थान मूल्‍य प्रणाली’ और ‘दशमलव प्रणाली’ का विकास भी भारत में ही हुआ।
  • शतरंज का खेल, जिसका प्राचीन भारतीय नाम “चतुरंग” है, भारत में ही शुरू हुआ।
  • तमिलनाडु के तंजौर का बृहदेश्‍वर मंदिर विश्व का प्रथम ग्रेनाइट वास्तुकला है।
  • ई.पू. 700 में तक्षशिला में स्‍थापित विश्वविद्यालय विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय था जहाँ संसार भर के 10,500 से अधिक विद्यार्थी 60 से अधिक विषयों का अध्ययन करते थे।
  • नालंदा विश्‍वविद्यालय चौथी शताब्‍दी में स्‍थापित किया गया था जो शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन भारत की महानतम उपलब्धियों में से एक है।
  • आयुर्वेद का ज्ञान होने के कारण भारत प्राचीन काल में चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी था।
  • सुश्रुत को शल्‍य चिकित्‍सा का जनक माना जाता है। लगभग 2600 वर्ष पहले सुश्रुत और उनके सहयोगियों ने मोतियाबिंद, कृत्रिम अंगों को लगना, शल्‍य क्रिया द्वारा प्रसव, अस्थिभंग जोड़ना, मूत्राशय की पथरी, प्‍लास्टिक सर्जरी और मस्तिष्‍क की शल्‍य क्रियाएँ आदि की।
  • भारत में 4 धर्मों का जन्‍म हुआ – हिन्‍दु, बौद्ध, जैन और सिक्‍ख धर्म और जिनका पालन दुनिया की आबादी का 25 प्रतिशत हिस्‍सा करता है।
  • 17वीं शताब्‍दी के आरंभ तक भारत विश्व का सर्वाधिक सम्पन्न देश था।
  • भारत विश्व का सबसे बड़ा गणतंत्र है।
  • भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है।
  • भारत से 90 देशों को सॉफ्टवेयर का निर्यात किया जाता है।
  • विश्‍व में सबसे बड़ा धार्मिक भवन अंगकोरवाट, हिन्‍दु मंदिर है जो कम्‍बोडिया में 11वीं शताब्‍दी के दौरान बनाया गया था।

दुःख की बात तो यह है कि उपरोक्त महत्वपूर्ण जानकारी को हमारे देश में शिक्षा के किसी भी पाठ्यक्रम में स्थान नहीं दिया गया है।

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