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धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर के जन्म की कथा (Story of birth of Dhritrashtra, Pandu and Vidur – Mahabharat stories in Hindi)

महाभारत (Mahabharat) महाकाव्य में धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर के जन्म की कथा आती है जो इस प्रकार है –

अपनी दोनों रानियों के साथ विचित्रवीर्य भोग-विलास में समय बिताने लगे पर दो रानियाँ होने के बावजूद भी उनकी कोई सन्तान नहीं हुई। बिना सन्तान के ही वे क्षय रोग से पीड़ित हो मर गये।

माता सत्यवती को कुल के नाश होने का डर सताने लगा। कुल को बचाने के लिए सत्यवती ने एक दिन भीष्म को बुलाकर कहा, “पुत्र! मैं तुम्हें आदेश देती हूँ कि तुम इन दोनों रानियों से विवाह करो और वंश को आगे बढ़ाने के लिए सन्तान पैदा करो।”

इस पर भीष्म ने कहा, “माता! मैं अपनी प्रतिज्ञा किसी भी स्थिति में तोड़ नहीं सकता। मैं न तो विवाह करूँगा और न ही सन्तान उत्पन्न करूँगा।”

भीष्म के इस जवाब को सुनकर सत्यवती को बहुत दुःख हुआ। अचानक उन्हें अपने पुत्र वेदव्यास की याद आ गई। याद करते ही वेदव्यास वहाँ आ पहुँचे।

सत्यवती उन्हें देख कर बोलीं, “हे पुत्र! तुम्हारे सभी भाई बिना किसी सन्तान के ही स्वर्ग चले गये। इसलिए मेरे वंश को बचाने के लिये मैं तुम्हें आज्ञा देती हूँ कि तुम उनकी पत्नियों से सन्तान उत्पन्न करो।”

वेदव्यास उनकी आज्ञा मान कर बोले, “माता! आप उन दोनों रानियों से कह दीजिये कि वे एक वर्ष तक नियम-व्रत का पालन करते रहें तभी उनको गर्भ धारण होगा।”

एक वर्ष बीत जाने पर वेदव्यास सबसे पहले बड़ी रानी अम्बिका के पास गये। अम्बिका ने उनके तेज से डर कर अपनी आँखें बन्द लीं।

वेदव्यास लौट कर माता से बोले, “माता अम्बिका का बड़ा तेजस्वी पुत्र होगा पर अम्बिका ने अपनी आँखें बन्द कर ली थीं इसलिए उसका पुत्र अंधा होगा।”

दुखी होकर सत्यवती ने वेदव्यास को छोटी रानी अम्बालिका के पास भेजा। अम्बालिका वेदव्यास को देख कर भय से पीली पड़ गई। उसके कमरे से लौटने पर वेदव्यास ने सत्यवती से कहा, “माता! अम्बालिका की देह डर के कारण पीली पड़ गई थी इसलिए वह पाण्डु रोग से ग्रसित पुत्र को जन्म देगी।”

तब सत्यवीती ने बड़ी रानी अम्बालिका को फिर से वेदव्यास के पास जाने के लिए कहा। इस बार बड़ी रानी ने खुद न जा कर अपनी दासी को वेदव्यास के पास भेज दिया। दासी ने आनन्दपूर्वक वेदव्यास से भोग कराया। इस बार वेदव्यास ने माता सत्यवती के पास आ कर कहा, “माते! इस दासी के गर्भ से वेद-वेदान्त में पारंगत अत्यन्त नीतिवान पुत्र उत्पन्न होगा।”

इतना कह कर वेदव्यास तपस्या करने चले गये। समय आने पर अम्बिका के गर्भ से जन्म से अंधा धृतराष्ट्र, अम्बालिका के गर्भ से पाण्डु रोग से ग्रसित पाण्डु और दासी के गर्भ से धर्मात्मा विदुर का जन्म हुआ।

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