Tag archives for मुंशी प्रेमचंद

Godan – 99 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 99 (Godan - Hindi Novel by Premchand)मगर अभी शायद उनके दु:ख का प्याला भरा न था। जो कुछ कसर थी, वह लड़की और दामाद के संबंध-विच्छेद ने पूरी कर दी। साधारण हिंदू ...

Godan – 98 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 98 (Godan - Hindi Novel by Premchand)जब वह चले गए, तो राजा साहब ने पूछा, 'मेरी बुराई करता होगा?''जी हाँ, मगर मैंने भी खूब बनाया।''शैतान है।''पूरा।''बाप-बेटे में लड़ाई करवा दे, मियाँ-बीबी में ...

Godan – 97 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 97 (Godan - Hindi Novel by Premchand)रायसाहब सीधे अपने बँगले पर आए और दैनिक पत्र उठाया था कि मिस्टर तंखा का कार्ड मिला। तंखा से उन्हें घृणा थी और उनका मुँह भी ...

Godan – 96 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 96 (Godan - Hindi Novel by Premchand)मगर इस चोट की प्रतिक्रिया भी तुरंत हुई। हम जिनके लिए त्याग करते हैं, उनसे किसी बदले की आशा न रख कर भी उनके मन पर ...

Godan – 95 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 95 (Godan - Hindi Novel by Premchand)रायसाहब इस समय नैनीताल में थे। यह संदेशा पा कर फूल उठे। यद्यपि वह विवाह के विषय में लड़के पर किसी तरह का दबाव डालना न ...

Godan – 94 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 94 (Godan - Hindi Novel by Premchand)रायसाहब का सितारा बुलंद था। उनके तीनों मंसूबे पूरे हो गए थे। कन्या की शादी धूम-धाम से हो गई थी, मुकदमा जीत गए थे और निर्वाचन ...

Godan – 93 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 93 (Godan - Hindi Novel by Premchand)उधर मेहता साहब खाट पर आसन जमाए किसानों की कुश्ती देख रहे थे। पछता रहे थे, मिर्जा जी को क्यों न साथ ले लिया, नहीं उनका ...

Godan – 92 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 92 (Godan - Hindi Novel by Premchand)सोना उठ कर आँगन में आ गई थी, मगर सिल्लो से टूट कर गले नहीं मिली। सिल्लो ने समझा, शायद मथुरा के खड़े रहने के कारण ...

Godan – 91 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 91 (Godan - Hindi Novel by Premchand)संध्या समय जब होरी ने सिलिया को डरते-डरते रुपए दिए, तो वह जैसे अपनी तपस्या का वरदान पा गई। दु:ख का भार तो वह अकेली उठा ...

Godan – 90 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 90 (Godan - Hindi Novel by Premchand)वर्षा समाप्त हो गई थी और रबी बोने की तैयारियाँ हो रही थीं। होरी की ऊख तो नीलाम हो गई थी। ऊख के बीज के लिए ...
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