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मातृभूमि (Matrbhumii)

प्रस्तुत है श्री मैथिलीशरण गुप्त (Maithilisharan Gupt) की सुप्रसिद्ध रचना मातृभूमि (Matrbhumii) -नीलाम्बर परिधान हरित तट पर सुन्दर है, सूर्य-चन्द्र युग मुकुट, मेखला रत्नाकर है, नदियाँ प्रेम प्रवाह, फूल तारे मंडन हैं, बंदीजन खग-वृन्द, शेषफन सिंहासन है, करते अभिषेक पयोद हैं, बलिहारी इस वेष की। हे मातृभूमि! तू सत्य ही, ...

मातृभूमि (Matribhoomi)

प्रस्तुत है मैथिलीशरण गुप्त (Mithilisharan Gupt) की रचना मातृभूमि (Matribhoomi)नीलाम्बर परिधान हरित तट पर सुन्दर है, सूर्य-चन्द्र युग मुकुट, मेखला रत्नाकर है, नदियाँ प्रेम प्रवाह, फूल तारे मंडन हैं, बंदीजन खग-वृन्द, शेषफन सिंहासन है, करते अभिषेक पयोद हैं, बलिहारी इस वेष की। हे मातृभूमि! तू सत्य ही, सगुण मूर्ति सर्वेश ...