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Godan – 89 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 89 (Godan - Hindi Novel by Premchand)नोहरी उन औरतों में न थी, जो नेकी करके दरिया में डाल देती हैं। उसने नेकी की है, तो उसका खूब ढिंढोरा पीटेगी और उससे जितना ...

Godan – 88 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 88 (Godan - Hindi Novel by Premchand)खन्ना ने उतर कर शांत स्वर में कहा, 'कार आप ले जायँ। अब मुझे इसकी जरूरत नहीं है।'मालती और मेहता भी उतर पड़े। मालती ने कहा, ...

Godan – 87 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 87 (Godan - Hindi Novel by Premchand)सहसा सामने सड़क पर हजारों आदमी मिल की तरफ दौड़े जाते नजर आए। खन्ना ने खड़े हो कर जोर से पूछा, 'तुम लोग कहाँ दौड़े जा ...

Godan – 86 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 86 (Godan - Hindi Novel by Premchand)डाक्टर मेहता को काम करने का नशा था। आधी रात को सोते थे और घड़ी रात रहे उठ जाते थे। कैसा भी काम हो, उसके लिए ...

Godan – 85 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 85 (Godan - Hindi Novel by Premchand)मिस्टर खन्ना को मजूरों की यह हड़ताल बिलकुल बेजा मालूम होती थी। उन्होंने हमेशा जनता के साथ मिले रहने की कोशिश की थी। वह अपने को ...

Godan – 84 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 84 (Godan - Hindi Novel by Premchand)मिल में असंतोष के बादल घने होते जा रहे थे। मजदूर 'बिजली' की प्रतियाँ जेब में लिए फिरते और जरा भी अवकाश पाते, तो दो-तीन मजदूर ...

Godan – 83 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 83 (Godan - Hindi Novel by Premchand)लेकिन झुनिया और गोबर में अब भी न पटती थी। झुनिया के मन में बैठ गया था कि यह पक्का मतलबी, बेदर्द आदमी है, मुझे केवल ...

Godan – 82 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 82 (Godan - Hindi Novel by Premchand)उसके शोक में भाग ले कर, उसके अंतर्जीवन में पैठ कर, गोबर उसके समीप जा सकता था, उसके जीवन का अंग बन सकता था, पर वह ...

Godan – 81 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 81 (Godan - Hindi Novel by Premchand)गोबर को शहर आने पर मालूम हुआ कि जिस अड्डे पर वह अपना खोंचा ले कर बैठता था, वहाँ एक दूसरा खोंचे वाला बैठने लगा है ...

Godan – 80 (Hindi Novel by Premchand)

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गोदान (Godan) मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) रचित कालजयी उपन्यास (Hindi Novel) है। गोदान - 80 (Godan - Hindi Novel by Premchand)होरी ने घर आ कर धनिया से कहा, 'अब?'धनिया ने उसी पर दिल का गुबार निकाला, 'यही तो तुम चाहते थे!'होरी ने जख्मी आँखों से देखा, ...