उस पार न जाने क्या होगा! (Us paar na jane kya hoga)श्री हरिवंशराय बच्चन (Harivanshrai Bachchan) जी की रचनाइस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का, लहरालहरा यह शाखाएँ कुछ शोक ...