Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

गज़ल (Ghazal), शायरी (Shayari) किसी के भी मन की भावनाओं को तरंगित कर देने वाली चीजें हैं। इन्हें पढ़ या सुनकर व्यक्ति झूम उठता है।

प्रस्तुत है कलीम उस्मानी (Kaleem Usmani) की गज़ल (Ghazal) “तेरे भीगे बदन की खुशबू से ” (Tere Bheege Badan ki Khushboo se)

तेरे भीगे बदन की खुशबू से लहरें भी हुईं मस्तानी सी
तेरा ज़ुल्फ़ को छूकर आज हुई ख़ामोश हवा दीवानी सी।

ये रूप का कुंदन दहका हुआ ये जिस्म का चंदन महका हुआ
इलज़ाम न देना फिर मुझको हो जाए अगर नादानी सी।

बिखरा हुआ काजल आँखों में तूफ़ान की हलचल साँसों में
ये नर्म लबों की ख़ामोशी पलकों में छुपी हैरानी सी।

शायर कलीम उस्मानी ने कामिनी के सौन्दर्य का अलौकिक वर्णन एक ग़जल के रूप में किया है। वे कहते हैं कि कामिनी के तन यदि भीग जाये तो ऐसी सुगन्ध उठती है कि उससे नदियों और सागरों की लहरें भी दीवानी हो जाती हैं। उसके घने काले केशों को छूकर खामोश हवा भी दीवानी हो जाती है।

दहकते हुए अग्नि में निखरे हुए कंचन की भाँति कामिनी का रूप होता है। उसके तन-बदन से चन्दन की महक आती हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति से यदि किसी प्रकार की नादानी हो जाये तो उस पर किसी प्रकार का आरोप लगाना सर्वथा गलत है।

कामिनी का सौन्दर्य के अलौकिक होने का विशिष्ट कारण है उसकी आँखों में काजल बिखरे होते हैं, साँसों में झंझावत का आभास होता है, उसके कोमल होठ मौन धारण किये होते हैं किन्तु पलकें हैरान-परेशान सी दिखाई देती हैं।

इस ग़जल का आनन्द प्रसिद्ध ग़जल गायक मेंहदी हसन की सुमधुर आवाज में सुनकर लीजिए।

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail