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कवर्धा में खप्पर निकलने की प्रथा (Unique Tradition of Khappar March)

khappar March

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कवर्धा (Kawardha) में नवरात्रि के अष्टमी की रात को खप्पर निकालने (Khappar March) की विशिष्ट प्रथा (unique tradition) है।

इस विशिष्ट प्रथा (unique tradition) के अन्तर्गत् प्रत्येक नवरात्रि की अष्टमी की अर्द्धरात्रि में 2-4, जिन्हें खप्परधारी कहा जाता है, लोग माँ परमेश्वरी मन्दिर तथा माँ चण्डी मंदिर से एक हाथ में अग्नि से धधकता हुआ खप्पर (Khappar) लेकर और दूसरे हाथ में चमकती नंगी तलवार लहराते हुए निकलते हैं।

खप्परधारी गहरे लाल रंग के वस्त्र पहने होते हैं, सिर पर कृत्रिम लंबे केश और मुकुट होता है। इनका रौद्ररूप अत्यन्त भयावह होता है।

खप्पर धारियों के आगे आगे हाथ में तलवार या झंडा लिए हुए कुछ लोग चलते हैं जिन्हें अगुआन या लंगूर कहा जाता है।

ये सभी विचित्र सी भयानक किलकारी “हूऽऽऊऊऊ… हूऽऽऊऊऊ… हूऽऽऊऊऊ…” की आवाज करते हुए निकलते हैं।

पूरे नगर के तथा आस-पास के गाँवों से आये हुए लोग इस खप्पर जुलूस को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर एकत्रित रहते हैं।

हजारों की संख्या में लोगों के उपस्थित होने के बावजूद भी भय के कारण सन्नाटा छाया रहता है।

खप्पर के पीछे माता की सेवा में लगे, परंपरानुसार मंत्रोच्चारणों के साथ पूजा-अर्चना करते पंडित चलते हैं।

यह खप्पर (Khappar) जिला/पुलिस प्रशासन तथा नगर में नगरवासियों को मन्दिर समिति के द्वारा आम सूचना दिए जाने के बाद परम्परागत निर्धारित मार्ग से शहर के सभी देवी मंदिरो से होता हुआ पुनः मंदिर प्रांगण पहुंचता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह प्रथा ग्राम व नगर की पूजा प्राकृतिक आपदाओं से मुक्ति दिलाने व नगर में विराजमान देवी-देवताओं का रीति-रिवाजों के अनुरुप मान-मनौव्वल स्थापित करने के लिए है।

मूल लेखः ” खप्पर ” कवर्धा देवी के मंदिर से दाएं हाथ में चमचमाती तलवार व बाये हाथ में अग्नि से धधकता खप्पर लेकर लाल रंग के वस्त्र में अष्ट्मी नवरात्री की रात्रि पहर को निकलता है रौद्ररूप में नगर भ्रमण में ?

Abhout Mr. DK Author:

DK Sharma

Mr. DK Sharma is a retired administrative officer of Chhattisgarh Government, having keen interest in archaeology, wild life, tours & travels.

Mr. Shrma’s blog is – यात्रा जिंदगी की Journey of life

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