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उर्दू गज़ल तथा शे’र-ओ-शायरी (Shairy) की बात बात ही निराली है। एक एक शे’र (Sher) मानो गागर में सागर होता है। मन एक अलग ही संसार में पहुँच जाता है गज़ल तथा शायरी (Shairy) सुनकर!

तो पेश है गज़ल (ghazal) – उसे भूल जा उसे भूल जा (Use Bhul Ja, Use Bhul Ja)

Shayari

वो जो मिल गया उसे याद रख
जो नहीं मिला उसे भूल जा

वो तेरे नसीब की बारिशें
किसी और छत पे बरस गईं
दिल-ए-बेख़बर मेरी बात सुन
उसे भूल जा उसे भूल जा

मैं तो गुम था उसके ही ध्यान में
उसकी आस में, उसके गुमान में
हवा कह गई मेरे कान में
मेरे साथ आ उसे भूल जा

जो बिसात-ए-जां उलट गया
वो जो रास्ते से पलट गया
उसे रोकने से हुसूल क्या
उसे मत बुला उसे भूल जा

 

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