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दुनिया भी झुकाई जा सकती है, केवल झुकाने वाला चाहिए (World can also be lowered)

लेखः परमानंद रेड्डी
डी/19 सेक्टर-1 देवेन्द्र नगर, रायपुर
फो. – 09303904649

क्या आप जानते हैं कि जिस व्यक्ति ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि  “I am a Muslim by religion, a Christian by culture and a Hindu by an accident.”, (मैं धर्म से मुसलमान हूँ, संस्कृति से ईसाई हूँ तथा दुर्घटनावश हिन्दू हूँ) वही व्यक्ति आजाद हिन्दुस्तान का प्रथम प्रधान मन्त्री बना तथा मृत्युपर्यन्त हमारे देश का प्रधान मन्त्री बना रहा।

वर्ष 1952 में प्रथम आम चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत से भी अधि सीटें लोकसभा में प्राप्त हुई थीं तथा सबसे बड़े विरोधी दल साम्यवादियों को मात्र 47 या 48 सीटें मिली थीं और उनके नेता श्री ए.के. गोपालन थे। जबकि भारतीय जनसंघ को मात्र 4 सीटें प्राप्त हुई थीं और उनके नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे।

तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने बड़ि गर्वोक्ति से भारतीय जनसंघ की ओर इशारा करते हुए कहा था कि “The communal forces are rising in India, I shall crush them, with my Iron hand. (साम्प्रदायिक शक्तियाँ भारत में सिर उठा रही हैं, मैं उन्हें अपने बालिष्ठ हाथों से कुचल डालूँगा।)”

विपक्ष में बैठे हुए साम्यवादियों ने अपनी मेजें थपथपाकर इस गर्वोक्ति का स्वागत किया था। पर भारतीय जनसंघ के नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तत्काल इस गर्वोक्ति का मुँहतोड़ जवाब दिया था कि “My country is the largest democracy in the world, where such intolerence can not be tolerated. I shall crush this crushing mentality of the Prime Minister with the help of my countrymen. (मेरा देश संसार का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है, जहाँ इस प्रकार कि असहिष्णुता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। मैं प्रधानमंत्री की इस कुचलने वाली मनोवृति को अपने देशवासियों के सहयोग से कुचल कर रख दूँगा.)”

दूसरे दिन समस्त राष्ट्रीय एवं अतर्राष्ट्रीय समाचार पत्रों में डॉ. मुखर्जी का यह वक्तव्य प्रथम पृष्ठ पर हेडलाईन के रूप में छापा गया था और पंडित नेहरू को अपनी गर्वोक्ति के लिए संसद में क्षमायाचना करनी पड़ी थी।

इससे निष्कर्ष यह निकलता है कि “दुनिया भी झुकाई जा सकती है, केवल झुकाने वाला चाहिए”।

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